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बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक श्री मनोज शर्मा ने बयान जारी करते हुए कहा।…

ललन सिंह का असली दर्द, विरोधियों में भी उनका नाम नही है, इसलिए तिलमिलाए हुए हैं- मनोज शर्मा

त्रिलोकी नाथ प्रसाद:-ललन सिंह विरोध के लायक भी नहीं है। इसलिए तो गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने उनके क्षेत्र में उनका नाम तक नहीं लिया। ऐसे में मुंगेर के सांसद और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह तिलमिलाए हुए हैं कि माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने उन्हें कोई तरजीह क्यों नहीं दी? जरूरत भी महसूस नहीं होता है कि माननीय अमित शाह जी अपनी जुबान से उनका नाम लें। अब जब भरी सभा में ललन सिंह जी का नाम नहीं आया तो वह तिलमिला गए, लगे उलूल जलूल बोलने, लगे विकास की बात करने, तो आज उन्हें हम बताना चाहते हैं उनके क्षेत्र में और बिहार में जो ठोस विकास किया गया है, वह पूर्व से लेकर अब तक भाजपा की केंद्र की सरकार ने ही किया है। ललन सिंह जी  सिर्फ गाल बजाते हैं। ललन सिंह का असली दर्द तो यह है उनका नाम विरोधियों के फेहरिस्त में भी नहीं है।

ललन सिंह जी, पिछले 19 सालों से डबल डेकर रेल सह सड़क पुल उद्घाटन की बाट जोह रहा था। 26 दिसंबर 2002 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने रिमोट से इसका शिलान्यास किया था। बीच में कांग्रेस की सरकार रही है, जिसकी गोद में ललन सिंह सहित नीतीश कुमार खेल रहे हैं। उन्हें इसकी जरा भी जरूरत महसूस नहीं हुई कि इस पुल का उद्घाटन किया जा सके। माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस पुल का उद्घाटन किया। 2002 में इस पुल की लागत 921 करोड़ आंकी गई थी लेकिन, बीच की सरकारों ने इतना समय गंवा दिया कि इसकी लागत 2777 करोड़ तक पहुंच गई। ललन सिंह जी को कांग्रेस से सवाल करना चाहिए कि बीच के दिनों में आखिर इस पुल का काम समय पर पूरा क्यों नहीं किया गया? आखिर तीन गुनी राशि क्यों बढ़ गई?

ललन सिंह जी, आप नल जल योजना की बात करते हैं तो, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की यह महत्वकांक्षी योजना थी और है। केंद्र सरकार ने बिहार वासियों के हित के लिए और बिहार के लोगों को स्वच्छ जल मिल सके इसको लेकर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार पैसे देने का प्रस्ताव दिया था लेनिन, बिहार सरकार ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। बिहार सरकार ने इस योजना में केंद्र सरकार पैसे लेने से मना क्यों किया था? इसकी भी वजह है। दरअसल, नल जल योजना के तहत बिहार सरकार ने लूट खसोट किया। इस योजना में करोड़ों-अरबों रुपए की लूट-खसोट की गई। यदि केंद्र सरकार से नितीश सरकार इस योजना के तहत पैसे लेती तो उन्हें जवाबदेही लेनी पड़ती। केंद्र सरकार इसकी मॉनिटरिंग करती और ऐसे में बिहार सरकार ने नल जल योजना को लूट का अड्डा बना दिया। नल जल योजना के पैसों का बंदरबांट हुआ है। इस योजना से बिहार के लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है।

 

ललन सिंह जी, केंद्र की सरकार ने अपने पहले ही कार्यकाल में बिहार सहित कई राज्यों के कई जिलों को मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए चयनित किया था। संबंधित सरकारों से चिन्हित जिलों में जमीन अधिग्रहित करके प्रस्ताव भेजने को कहा था। उस समय आपके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पूरे प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में दबा दिया था और केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा था। रही बात मुंगेर में मेडिकल कॉलेज की तो इसका प्रस्ताव माननीय श्री मंगल पांडे जी ने दिया था जब वह बिहार के स्वास्थ्य मंत्री थे तो उन्होंने मुंगेर में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव दिया था। ललन सिंह जी, जरा नीतीश जी से पूछिएगा कि मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव मंगल पांडे जी ने कैबिनेट में दिया था की नहीं, जिसकी स्वीकृति कैबिनेट से हुई थी।

ललन सिंह जी, जरा बिहार की सरकार से पूछिये कि आरजेडी और जेडीयू की सरकार में बिहार पुलिस के ऊपर कितने अटैक हुए हैं। आप पुलवामा अटैक की बात करते है तो, वो अटैक आतंकवादियों ने किए थे। लेकिन, बिहार में लगातार आम लोग पुलिस के ऊपर हमले कर रहे हैं। आम जनता पुलिसिंग से नाराज है। तभी तो 2022 में 450 से अधिक हमले पुलिस पर हुए लेकिन, इसका जवाब आप लोगों के पास नहीं है। आखिर, आम लोग उग्र होकर पुलिस को क्यों पीट रहे हैं।

 

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