किशनगंज : हक की आवाज उठाने पर सुरक्षा गार्डों को नौकरी से निकालने की धमकी
वेतन कटौती, फर्जी भुगतान और एक्स सर्विसमैन के नाम पर गड़बड़ी के आरोप
किशनगंज,16मार्च(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, सदर अस्पताल सहित जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में तैनात सुरक्षा गार्डों के सामने अब अपनी नौकरी बचाने की चिंता खड़ी हो गई है। गार्डों का आरोप है कि वेतन कटौती, फर्जी भुगतान और अन्य अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। कई सुरक्षा गार्डों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आउटसोर्सिंग एजेंसी और उससे जुड़े लोगों की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वे किसी भी तरह का विरोध न करें।
गार्डों के अनुसार हाल के दिनों में कई कर्मचारियों को सादे कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए भी मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में उनके खिलाफ कोई भी दस्तावेज तैयार किया जा सके।
गार्डों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें साफ शब्दों में नौकरी समाप्त करने की चेतावनी दी जाती है। हालांकि मामला सामने आने के बाद आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है।
वेतन कटौती से गार्डों में आक्रोश
गार्डों का कहना है कि सरकार द्वारा तय भुगतान और उन्हें मिलने वाले वेतन के बीच भारी अंतर है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार सरकार एक्स सर्विसमैन श्रेणी के गार्ड के लिए प्रतिदिन 1293 रुपये आउटसोर्सिंग एजेंसी को देती है, जबकि तैनात गार्डों को मात्र 500 रुपये प्रतिदिन ही मिलते हैं। इसी तरह सिविल गार्डों के लिए सरकार की ओर से प्रतिदिन 755 रुपये का भुगतान किया जाता है, लेकिन उन्हें केवल 290 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
गार्डों का आरोप है कि शेष राशि एजेंसी के पास चली जाती है और इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता। कई गार्डों ने यह भी आरोप लगाया कि बहाली के समय उनसे 20 से 30 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई थी। इसके बावजूद उन्हें न तो सैलरी स्लिप दी जाती है और न ही उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाती है। महिला सुरक्षा गार्डों ने भी आरोप लगाया कि वेतन और सुविधाओं को लेकर सवाल उठाने पर उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी दी गई।
जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई का इंतजार
सदर अस्पताल में सुरक्षा गार्डों की तैनाती और भुगतान में गड़बड़ी के आरोपों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई गार्डों को एक्स सर्विसमैन बताकर भुगतान लिया जा रहा था, लेकिन इसके समर्थन में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जांच टीम ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है।
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को पत्र भेजकर आउटसोर्सिंग एजेंसी सहित गड़बड़ी में संलिप्त स्वास्थ्य अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में शिकायतकर्ता और कांग्रेस जिलाध्यक्ष इमाम अली चिंटू ने कहा कि यदि पूरे जिले के अस्पतालों में सुरक्षा गार्डों की तैनाती और भुगतान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी सामने आ सकती है। फिलहाल गार्डों में भय का माहौल है और वे अपनी नौकरी बचाने के साथ अपने अधिकारों के लिए न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आउटसोर्सिंग एजेंसी पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और गड़बड़ी में संलिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।



