किशनगंज : सदर अस्पताल में सुरक्षा गार्ड भुगतान घोटाला, डीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश
किशनगंज,13मार्च(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, सदर अस्पताल में सुरक्षा गार्डों की तैनाती और उनके भुगतान में बरती गई गंभीर अनियमितता के मामले में जिलाधिकारी विशाल राज ने कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया है। साथ ही संबंधित एजेंसी को अवैध रूप से ली गई अतिरिक्त राशि दो दिनों के भीतर सरकारी खजाने में जमा कराने का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
बताया जाता है कि सदर अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों की वास्तविक संख्या और कागजों में दर्शाई गई संख्या के आधार पर किए गए भुगतान में अंतर की शिकायत मिली थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर उप विकास आयुक्त और जिला कार्यक्रम प्रबंधक की संयुक्त जांच टीम गठित की गई। जांच टीम की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल उपाधीक्षक और प्रबंधक द्वारा सुरक्षा कर्मियों के कार्यों का न तो नियमित अनुश्रवण किया गया और न ही उनका सही सत्यापन किया गया। इसी लापरवाही के कारण एजेंसी को गलत तरीके से अधिक भुगतान किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि पटना स्थित आउटसोर्सिंग एजेंसी समानता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया। जांच दल के समक्ष एजेंसी तैनात कर्मियों का स्पष्ट विवरण और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस पर डीएम ने एजेंसी से अतिरिक्त भुगतान की राशि की वसूली करने तथा अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इस पूरे मामले को उजागर करने में सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष इमाम अली उर्फ चिंटू की अहम भूमिका रही। सामाजिक कार्यकर्ता आबिद हुसैन द्वारा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर मामले का खुलासा हुआ, जबकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष इमाम अली ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर जांच की मांग की थी।
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दो दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही एजेंसी द्वारा ली गई अतिरिक्त राशि को दो दिनों के भीतर सरकारी खाते में जमा कराने और भविष्य में भुगतान से पूर्व कार्यों का नियमित सत्यापन सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।
डीएम ने स्पष्ट कहा है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और गलत सत्यापन के कारण सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है। मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सरकारी धन की एक-एक पैसे की वसूली सुनिश्चित की जाएगी।


