*बिहार के खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण और ई-नीलामी को मिलेगी गति*
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक, कोयला गैसीकरण सहित खनिज ब्लॉकों के विकास पर मंथन

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/ ग्लूकोनाइट, लाइमस्टोन, निकेल-क्रोमियम, पीजीई एवं पत्थर ब्लॉकों की ई-नीलामी और उत्पादन/प्रेषण की हुई समीक्षा
पटना, 28 सितंबर। बिहार में खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, खनिज ब्लॉकों के विकास तथा पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से सोमवार को माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री, कोयला एवं खान मंत्रालय, भारत सरकार श्री सतीश चंद्र दुबे की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिहार सरकार के माननीय खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, विभाग के वरीय पदाधिकारी, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट, एमईसीएल सहित अन्य संबंधित संस्थानों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बिहार के खनिज क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से भागलपुर जिले में अन्वेषित कोयला ब्लॉक में भूमिगत कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयला संसाधनों के दोहन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से भूमिगत कोयला गैसीकरण से संबंधित प्रस्ताव पर अनुकूलतापूर्वक विचार करने तथा आवश्यक समन्वय एवं सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया गया।
माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि बिहार में उपलब्ध खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक आधारित उपयोग की दिशा में केंद्र सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसे आधुनिक विकल्पों की संभावनाओं पर संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। संभावित निवेशकों एवं बोलीदाताओं को तकनीकी संभावनाओं से अवगत कराने के लिए पटना में रोड शो आयोजित करने की दिशा में भी आवश्यक पहल की जाएगी।
बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार की खनिज संपदा राज्य के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। हमारा प्रयास है कि खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी एवं सतत तरीके से उपयोग हो तथा अन्वेषण से लेकर ई-नीलामी और उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए। केंद्र सरकार के सहयोग और संबंधित संस्थानों के समन्वय से बिहार के खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं को विकसित किया जाएगा।
बैठक में बिहार में खनिज अन्वेषण कार्यों को बढ़ावा देने तथा अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अतिरिक्त अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों के माध्यम से भी विभिन्न खनिजों के व्यापक अन्वेषण कार्य कराए जाने की आवश्यकता पर विचार किया गया।
ग्लूकोनाइट, लाइमस्टोन सहित प्रमुख खनिजों से संबंधित खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की गई। रोहतास जिले में नीलामित पिपराडीह-भुरवा ग्लूकोनाइट ब्लॉक, चुटिया-नौहट्टा ग्लूकोनाइट ब्लॉक एवं भोरा-कथरा लाइमस्टोन ब्लॉक तथा गया जिले में नीलामित गेंजाना निकेल-क्रोमियम एवं पीजीई ब्लॉक में उत्पादन एवं प्रेषण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। सभी आवश्यक वैधानिक एवं अन्य प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए यथाशीघ्र उत्पादन एवं प्रेषण प्रारंभ करने पर बल दिया गया।
बिहार में पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी की प्रगति तथा इससे संबंधित विभिन्न विषयों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। ई-नीलामी की प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने तथा खनिज ब्लॉकों से शीघ्र उत्पादन एवं प्रेषण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई पर चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार के खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित अन्वेषण, खनिज संपदा का प्रभावी एवं सतत उपयोग तथा पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया को गति प्रदान करना रहा। इसके माध्यम से राज्य में खनिज क्षेत्र में निवेश एवं खनिज आधारित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा राजस्व वृद्धि की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में खान मंत्रालय, भारत सरकार एवं खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार सरकार के बीच बेहतर समन्वय एवं सहयोग स्थापित करते हुए बिहार के खनिज क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।



