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*गर्मी से पहले पेयजल तैयारियों की समीक्षा; पंचायतवार भ्रमण, मरम्मति दल और वैकल्पिक जल श्रोतों की व्यवस्था पर निर्देश।*

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में आज विभागीय मुख्यालय में आगामी ग्रीष्म ऋतु के दौरान संभावित पेयजल आपूर्ति संबंधी चुनौतियों से निपटने हेतु विभाग की तैयारियों की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता उपस्थित रहे, जबकि अधिक समस्या संभावित क्षेत्रों के कार्यपालक अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

बैठक में सचिव द्वारा निर्देश दिया गया कि ग्रीष्मकाल के दौरान संभावित पेयजल संकट से प्रभावी रूप से निपटने हेतु चलंत मरम्मति दलों की रवानगी अगले सप्ताह से प्रारंभ की जाए, जिसे संबंधित जिला पदाधिकारी द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक सभी तैयारियाँ तत्काल पूर्ण करने तथा किसी भी स्तर पर अतिरिक्त संसाधन अथवा स्वीकृति की आवश्यकता होने पर उसका प्रस्ताव अविलंब मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए। यह भी स्पष्ट किया गया कि मरम्मति दलों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जाए तथा उनकी तैनाती एवं संचालन की पूरी प्रविष्टि विभागीय एमआईएस प्रणाली पर अनिवार्य रूप से की जाए।

ग्रीष्म ऋतु की पूर्व तैयारी के तहत सचिव ने निर्देश दिया कि सभी कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता 15 मार्च तक अपने-अपने क्षेत्र की प्रत्येक पंचायत का अनिवार्य रूप से भ्रमण कर जलापूर्ति की स्थिति का फील्ड सर्वे करें। इस सर्वे के आधार पर संभावित समस्या-ग्रस्त पंचायतों एवं टोलों की पहचान करते हुए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएँ समय रहते सुनिश्चित की जाएँ। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नए चापाकलों की स्थापना केवल वैकल्पिक पेयजल स्रोत के रूप में ही की जाएगी, विशेषकर उन छूटे टोलो/बसावटों में जहाँ किसी कारणवश ‘हर घर नल का जल’ योजना के अंतर्गत अवसंरचना का निर्माण अभी पूर्ण नहीं हो सका है। चापाकल स्थापना का स्थल चयन जलस्तर की स्थिति, पंचायत स्तर पर किए गए फील्ड सर्वे एवं जिला प्रशासन के साथ समन्वय के आधार पर किया जाएगा।

बैठक में ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस से संबंधित अनुबंधों की स्थिति, टैंकर परिचालन, वाटर एटीएम की कार्यशीलता तथा जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव की भी समीक्षा की गई। जिन योजनाओं में एकरारनामा की अवधि समाप्त होने वाली है, वहाँ नए संवेदक के चयन तक वर्तमान संवेदक को समय विस्तार देने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति एवं रख-रखाव प्रभावित न हो।

इसी क्रम में पंप ऑपरेटरों के भुगतान के विषय पर विशेष रूप से चर्चा करते हुए सचिव ने स्पष्ट किया कि पंप ऑपरेटरों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना संबंधित कार्यपालक अभियंताओं की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी है। इसके लिए सभी कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित जिला पंचायती राज पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित भुगतानों का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करें। आवश्यकता होने पर जिला पदाधिकारी स्तर से भी सहयोग लिया जाए तथा यदि जिला स्तर पर भुगतान से संबंधित समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो ऐसे मामलों को अविलंब मुख्यालय स्तर पर रेखांकित किया जाए। सचिव ने यह भी रेखांकित किया कि योजनाओं के सुचारु संचालन में पंप ऑपरेटरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः उनके भुगतान को विभाग द्वारा उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (CGRC) के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए सचिव ने निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक लंबित शिकायतों के लिए संबंधित कार्यपालक अभियंता के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र में 8.42 प्रतिशत, पटना प्रक्षेत्र में 9.19 प्रतिशत, पूर्णिया प्रक्षेत्र में 5.30 प्रतिशत तथा भागलपुर प्रक्षेत्र में 7.47 प्रतिशत शिकायतें लंबित हैं, जबकि सीजीआरसी के अंतर्गत राज्य स्तर पर कुल लंबितता 8.11 प्रतिशत है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विभागीय मुख्यालय स्तर पर अलग-अलग टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में भेजा जाएगा, ताकि ग्रीष्मकाल से संबंधित सभी तैयारियों की जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके ।

बैठक में विभागीय सचिव श्री पंकज कुमार पाल, विशेष सचिव श्री संजीव कुमार, अपर सचिव श्री अरविंद कुमार, अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव श्री नित्यानंद प्रसाद, श्री अभय कुमार, सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता एवं विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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