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“रागों की आधुनिक यात्रा: पटना में झूम उठा विश्व संगीत दिवस”

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/विश्व संगीत दिवस के अवसर पर रागा फ्यूजन बैंड, मुंबई द्वारा भव्य सांस्कृतिक संध्या

विश्व संगीत दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना का हरि उप्पल प्रेक्षागृह संगीतमय अनुभूतियों से सराबोर रहा। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार एवं भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में “रागा फ्यूजन बैंड, मुंबई” ने अपने अद्वितीय प्रदर्शन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसे निदेशक, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, श्रीमती रुबी एवं भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशाँ ने संयुक्त रूप से संपन्न किया।

शाम की शुरुआत मो० सलीम (बाँसुरी) एवं श्री शांतनु रॉय (तबला) की जुगलबंदी से हुई। जैसे ही बाँसुरी की मधुर तान और तबले की लय ने ताल पकड़ी, पूरा सभागार सुरों की दुनिया में खो गया।

“रागा फ्यूजन” एक ऐसी संगीतमय यात्रा है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई को आधुनिक वाद्ययंत्रों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के माध्यम से जोड़ती है। इस बैंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह शास्त्रीय रागों की गरिमा को बनाए रखते हुए युवा पीढ़ी से सहजता से जुड़ जाता है।

बैंड के सभी सात कलाकारों ने मंच पर अपनी उपस्थिति से समां बांध दिया:

जयंत पटनायक – तबला और माउथ परकशन

अमृतांशु दत्ता – भारतीय स्लाइड गिटार

हर्षित शंकर – बाँसुरी

अजय तिवारी – गायन

सचिन शाही – ड्रम

शशि भूषण – बास गिटार

शॉमिल पंडित – गिटार

श्रीराम रवि – साउंड इंजीनियर

इन कलाकारों ने राग आधारित प्रसिद्ध बॉलीवुड गीत “अलबेला सजन आयो रे” (राग अहिर भैरव) की प्रस्तुति से श्रोताओं की संवेदनाओं को स्पर्श किया। इसके अतिरिक्त बांग्ला गीत “एकला चलो रे” और छठ महापर्व के पारंपरिक लोकगीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

बैंड की प्रस्तुतियों में जुगलबंदी की सधी हुई लयबद्धता और स्वरलहरियों का अद्भुत संतुलन था। हर रचना के अंत में दर्शकों की तालियों की गूंज इस बात का प्रमाण थी कि रागा फ्यूजन बैंड ने संगीत प्रेमियों के दिलों को छू लिया।

कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारीगण, भारतीय नृत्य कला मंदिर के कर्मचारीगण, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएँ तथा शहर के संगीत प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच संचालन की जिम्मेदारी श्रीमती सोमा चक्रवर्ती ने अत्यंत आकर्षक एवं भावपूर्ण शैली में निभाई।

यह संध्या केवल एक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भारतीय संगीत की जीवंतता, उसकी विविधता और उसकी नवीन अभिव्यक्ति का साक्षात उत्सव था। रागा फ्यूजन ने यह सिद्ध किया कि जब परंपरा और आधुनिकता का संगम होता है, तब संगीत केवल सुना नहीं जाता, महसूस किया जाता है।

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