
रांची//रांची के दीपा टोली इलाके में नौवीं क्लास का स्टूडेंट हिमांशु मुंडा मम्मी-पापा से कहासुनी के बाद घर छोड़कर चला गया। घर के इकलौते बेटे के अचानक गायब हो जाने से परिवार वालों में हड़कंप मच गया। माता-पिता का रो रो कर बुरा हाल हो गया। बता दे की हिमांशु मुंडा DAV पब्लिक स्कूल, बरियातू में नौवीं का छात्र है। वह सदर थाना क्षेत्र के दीपा टोली का रहने वाला है। पिता सरकारी नौकरी में हैं और मां प्राइवेट स्कूल में टीचर। हिमांशु उनका इकलौता बेटा है। माता पिता के अनुसार, हिमांशु पिछले कुछ दिनों से चिड़चिड़ा रहने लगा था। घर में उसे समझाया जाता, कभी डांटा भी जाता। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक दिन वह गुस्से में घर छोड़कर चला जाएगा।
हिमांशु के गायब होने के 48 घंटे बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो घरवाले सदर थाना पहुंचे। मामला थानेदार कुलदीप कुमार के पास पहुंचा।जो इस कड़ी में एक अहम किरदार बनकर सामने आए, उन्होंने न सिर्फ एक पुलिस ऑफिसर का फर्ज निभाया बल्कि एक गार्जियन की तरह परिवार को भरोसा दिया, मामले को समझा और हालात बिगड़ने से पहले ही सबकुछ संभाल लिया। नतीजा यह रहा कि हिमांशु सही सलामत अपने घर लौट आया।
इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने शिकायत दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम भेजकर खुद हिमांशु के घर पहुंचे। वहां उन्होंने हिमांशु के 3-4 दोस्तों से बातचीत की। बच्चे डरे हुए थे। उन्हें डर था कि पुलिस उन्हें भी पकड़ लेगी, पूछताछ करेगी या डांटेगी। लेकिन इंस्पेक्टर ने बच्चों को डांटने की बजाय एक गार्जियन की तरह मोटिवेट किया। उन्होंने बड़े प्यार से बच्चों को समझाते हुए कहा… “डरने और परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने दोस्त को बुला लो। उसे या तुम लोगों को कोई कुछ नहीं कहेगा।” यह बात बच्चों के मन में उतर गई। वही बच्चों की एक्टिवििटी देखकर इंस्पेक्टर समझ चुके थे, हिमांशु अपने दोस्तों के संपर्क में है। उन्हें अंदाजा हो गया था कि हिमांशु कहीं बहुत दूर नहीं गया है। वह अपने दोस्तों के संपर्क में होगा। यहीं उनकी सूझबूझ काम आई। उन्होंने दबाव बनाने की जगह भरोसे की रणनीति अपनाई। बच्चों को भरोसे में लिया, डर खत्म किया और दोस्ती के रिश्ते को हथियार बना दिया।
कुछ समय तक समझदारी एवं प्यार से समझने के बाद मोटिवेशन रंग लाया, हिमांशु वापस लौट आया इंस्पेक्टर के शब्दों ने जैसे जादू सा असर किया। फिर दोस्तों ने हिमांशु से संपर्क किया। उसे बताया गया कि उसे कोई कुछ नहीं कहेगा न ही डांट पड़ेगी और नाही कोई मारेगा। बस घर लौट आओ। कुछ समय बाद हिमांशु सामने आया। पुलिस ने उसे रामगढ़ इलाके से बरामद कर लिया और फिर सुरक्षित सदर थाना लाकर परिजनों के हवाले कर दिया। इधर बेटे को देखकर मां रो पड़ी और पिता ने राहत की सांस ली। यह उनकी जिंदगी का सबसे सुखदाई पल था। फिर परिवार के लोगों ने इंस्पेक्टर को दुआओं के साथ धन्यवाद दिया और अपने घर चले गए।
इन सब के बाद इंस्पेक्टर कुलदीप ने सभी परिवार वालों से अपील की है कि बच्चों को डांटें नहीं, बात करें। उन्हें दोस्त बनाएं। इस मामले के बाद उन्होंने साफ कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ लगातार बातचीत करनी चाहिए। बच्चों की हर हरकत पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि बच्चे खुद अपनी बात खुलकर कह सकें, इस तरह का माहौल बनाएं। उन्होंने आगे कहा कि आजकल बच्चे जल्दी गुस्सा हो जाते हैं और कई बार छोटी बातों को बहुत बड़ा समझ लेते हैं। ऐसे में माता-पिता का व्यवहार और समझदारी ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।



