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बिहार राज्य धार्मिक न्यास संरक्षण एवं बिकास परिषद के संयोजक कमलेश कुमार पाण्डेय ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने/पद छोड़ने की मांग पत्र लिखकर किया है।।…

गुड्डू कुमार सिंह:-जारी पत्र मे श्री पाण्डेय ने कहा है कि बहुत आशा और विश्वास से बिहार के हिंदु धार्मिक स्थलों की सुरक्षा/ संवर्द्धन के साथ ही बिकास हेतु न्यास बोर्ड का गठन किया था।जिसे बोर्ड अध्यक्ष के कार्यकलाप ने खंड खंड कर दिया।


बोर्ड अध्यक्ष के सनकी कार्यकलाप एवं सदस्यों की निजी स्र्वार्थ में मूकदर्शक बने रहने से से राज्य के अधिकांश धर्मस्थल रूपी न्यास कराह रहें हैं। वहीं न्यास से जूड़े कार्यकर्त्ता /न्यासधारी /संत/,महंत/ सेवायत /सेवादार त्राहि त्राहि कर रहे हैं।क्योंकि बोर्ड के अधिकारियों के कार्यकलाप पुर्वाग्रह से ग्रसित एवं भ्रष्टाचार से पोषित होने की आशंका दृष्टि गोचर है।


अध्यक्ष के अधिकांश फैसलों के बिवादास्पद होने के कारण संपन्न लोगों कोर्ट जाकर न्याय पाते हैं।जबकि बिपन्न लोग अध्यक्ष की सनक के शिकार होते हैं। और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता ।जिसका बुरा प्रभाव संबंधित धार्मिक स्थलरूपी न्यास पर पड़ता है।


सोचनीय है कि अध्यक्ष कोर्ट का नोटिस पाते ही अपने ही फैसलों को रिकाल भी कर लेने में परहेज नहीं करते।क्योंकि इन्हें पहले ही पता रहता हैं। कि इन्होंने गलत किया है। लेकिन जहां ढिठाई से पेश आते हैं।तो इन्हें कोर्ट का कोपभाजन भी बनना पड़ता है। फिर भी इनका सनकी ब्यवहार कायम रहता है।

द्रष्टब्य है कि उच्च न्यायालय पटना ने CWJC 24051 /2019, CWJC 9415 के फैसले में इनके कार्यकलाप को सनकी मानसिकता बाला बताते हुए न्यासधारियों को घुमाने एवं परेशान करनेवाला बताया।तो CWJC no.4944/2020 में दस हजार का अर्थदंड लगाया।तो जहानाबाद में २६०० रूपया दंड भुगतान करने की सूचना मिली है।

बर्तमान अध्यक्ष/बोर्ड के कार्यकलाप से तंग आकर ही स्क्रबर ए डी जे ०४ ने अवमानना वाद इस चेतावनी के साथ नहीं चलाया कि वे भविष्य में ऐसी गलती नहीं करेंगे।
लेकिन अध्यक्ष के सनकी कार्यकलाप उजागर हो गया है। राज्य के मठ -मंदिर,संगत,पंगत आदि धार्मिक स्थल एवं उससे जूड़े लोग असुरक्षित हो गए हैं । अध्यक्ष /बोर्ड के सदस्य अपने पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके है।
अत:बोर्ड अध्यक्ष को हिंदु धर्म

स्थलों की दशा और दिशा बिगाड़ने की जिम्मेवारी लेते हुए इस्तिफा दे देना चाहिए।

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