पैक्स एवं एफपीओ के माध्यम से ग्रामीण बिहार में होगा रोज़गार सृजन और बढ़ेगी आत्मनिर्भरता: साहकारिता विभाग

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/बिहार राज्य के ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण, आत्मनिर्भरता और रोज़गार के सृजन के लिए सोमवार 16 मार्च, 2026 को साहकारिता विभाग ने 25 मॉडल पैक्स और एफपीओ के साथ तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पैक्स को केवल ऋण समितियां बने रहना नहीं बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था की नींव बनाना है, ताकि ग्रामीण इलाकों में रोज़गार का सृजन हो और किसी को भी रोज़गार की तलाश में राज्य से बाहर पलायन ना करना पड़े।
पैक्स को बाजार के साथ जोड़ना, बहुद्देशीय बनाना और व्यापार में विविधीकरण करना सहकारिता विभाग ने अपना लक्ष्य बनाया है। जिसके लिए इन तीन दिनों में विभिन्न ई-कॉमर्स प्लेटफार्म, बीज उत्पादक विक्रेता, खाद्य विक्रेता, कीटनाशक विक्रेता एवं अन्य थोक ख़रीददार से जोड़ा जा रहा है। सहकारिता विभाग ने बिहार के 8400 से अधिक पैक्स को डिजिटल बनाने का लक्ष्य बनाया है ताकि पैक्स व्यापार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके।
इस कार्यशाला के अंतर्गत विक्रेता-ख़रीददार संपर्क का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न कंपनियों, एग्री-प्रोसेसिंग इकाइयों, रिटेल चेन तथा संस्थागत खरीदारों के साथ पैक्स एवं एफपीओ प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष संवाद सुनिश्चित किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल परिचयात्मक बैठक नहीं, बल्कि ठोस व्यावसायिक संभावनाओं, आपूर्ति समझौतों और दीर्घकालिक बाजार संबंधों की आधारशिला रखना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन माननीय सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार द्वारा किया गया। अपने उद्घोष में माननीय मंत्री डॉ प्रमोद कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि पैक्स और एफपीओ केवल पारंपरिक क्रेडिट एवं अधिप्राप्ति गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं प्रत्यक्ष विपणन के माध्यम से मजबूत आर्थिक इकाइयों के रूप में विकसित हों। उन्होंने कहा कि विभाग का स्पष्ट विज़न है “क्रेडिट से कमर्शियल एंटरप्राइज” की ओर रूपांतरण, ताकि ग्रामीण स्तर पर आय सृजन के स्थायी मॉडल विकसित हो सकें।
साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधुनिक भंडारण, प्रोसेसिंग यूनिट और प्रत्यक्ष बाजार संपर्क के माध्यम से पैक्स एवं एफपीओ को प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा, जिससे स्थानीय उत्पाद ‘मेड इन बिहार’ पहचान के साथ राष्ट्रीय बाजार तक पहुँच सकें। उन्होंने पैक्स अध्यक्षों को सदस्यता बढ़ाने में उदारता बरतने के साथ सरकारी योजनाओं में जन भागीदारी पर बल देने को कहा।
सहकारिता विभाग के सचिव श्री धर्मेन्द्र सिंह ने कहा- “यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि पैक्स को उद्यमी बनाने की पहल है। पैक्स और एफपीओ को स्थानीय संसाधनों के आधार पर उद्यम तैयार करने, जोखिम आकलन करने, और बाज़ार की मांग के अनुसार उत्पादन एवं प्रसंस्करण करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि चयनित मॉडल संस्थाएं राज्य में प्रतिकृति योग्य उदाहरण बनें।”
सहयोग समितियों के निबंधक श्री रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि विभाग का मिशन है पैक्स के माध्यम से वैकल्पिक रोज़गार का सृजन करना, जिसमें गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार दिया जाए और आत्मनिर्भर गांव बनाया जाए, ताकि जो लोग गांव से बाहर काम के लिए जा रहे हैं वे गांव में रहकर रोजगार से जुड़ें।
व्यवसाय विविधीकरण पर विशेष ध्यान रखते हुए प्रशिक्षण में मक्का आधारित पशु आहार उत्पादन, सरसों तेल प्रसंस्करण, मशरूम एवं मसाला प्रसंस्करण, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण तथा अन्य कृषि आधारित सूक्ष्म उद्यमों के व्यवहार्य मॉडलों की जानकारी दी जाएगी। इन मॉडलों के माध्यम से पैक्स एवं एफपीओ को पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़कर मूल्य संवर्धन आधारित आय सृजन के अवसरों की पहचान करने में सक्षम बनाया जाएगा।
साथ ही वित्तीय अभिसरण अंतर्गत NABARD, National Cooperative Development Corporation (NCDC) तथा Bihar State Cooperative Bank द्वारा उपलब्ध वित्तीय सहायता, परियोजना आधारित ऋण, कार्यशील पूंजी और सब्सिडी योजनाओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा, ताकि प्रस्तावित उद्यमों को व्यवहारिक रूप से स्थापित किया जा सके और उनकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो।
साथ ही प्रतिभागियों को व्यवहारिक एवं व्यावसायिक दृष्टि से उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग तथा विपणन रणनीति से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा, ताकि सहकारी संस्थाएं स्थानीय संसाधनों के आधार पर टिकाऊ एवं लाभकारी उद्यम विकसित कर सकें।


