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सहरसा : नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर के काले कारनामे उजागर, भाजपा ने की निष्पक्ष जांच की मांग

सहरसा,30जनवरी(के.स.)। धर्मेंद्र सिंह, नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर द्वारा टेंडर और विभागीय योजनाओं के संचालन में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। योजनाओं के चयन से लेकर क्रियान्वयन तक में भारी गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई योजनाएं कागजों में तो मौजूद हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई अस्तित्व नहीं दिखता।सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद द्वारा संचालित कई योजनाओं का चयन बिना स्थल निरीक्षण के ही कर लिया गया। विभागीय पदाधिकारी, कनीय अभियंता और संबंधित कर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने योजना चयन से पहले मौके का सत्यापन नहीं किया। नतीजतन, जिन स्थानों के लिए टेंडर निकाले गए, वहां काम शुरू ही नहीं हुआ, जबकि अन्य जगहों पर मनमाने ढंग से निर्माण कार्य करा दिया गया।

इसकी बानगी निविदा आमंत्रण सूचना संख्या-02/2025-26 से मिलती है। प्रकाशित क्रम संख्या-24 के तहत वार्ड 25 में रेलवे सीमान से मो. आफताब के प्लॉट होते हुए शमशुल के प्लॉट तक लगभग 24 लाख 88 हजार 600 रुपये की लागत से पीसीसी सड़क निर्माण प्रस्तावित है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वार्ड 25 में ऐसा कोई स्थल दूर-दूर तक मौजूद नहीं है। जिस जगह को योजना स्थल बताया जा रहा है, वह वास्तव में वार्ड 27 के अंतर्गत खेत की पगडंडी और एक संकरी गली है, जो दीवार से सटी हुई है।

इसी तरह, योजना क्रम संख्या-29 के तहत वार्ड 09 में भौरा कलवर्ट से बिंदेश्वरी पंडित की जमीन तक 24 लाख 83 हजार 700 रुपये की लागत से पीसीसी सड़क निर्माण का प्रावधान है। बताया जाता है कि संवेदक को मूल स्थल का पता नहीं चलने पर सिंचाई विभाग की नहर पर पहले से बनी पुलिया के पास पूर्व दिशा से कार्य शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों ने कार्य स्थल पर योजना बोर्ड नहीं लगाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और पारदर्शिता की मांग की।ग्रामीणों का आरोप है कि इस योजना के नाम पर पहले से बनी सड़क की सोलिंग उखाड़ दी गई। जब गलत स्थल पर कार्य का विरोध हुआ, तो निर्माण कार्य का रुख नहर की ओर मोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद की अधिकांश योजनाएं “रामभरोसे” चलाई जा रही हैं, जिससे सरकारी राशि की खुलेआम बंदरबांट हो रही है।

मामले को लेकर भाजपा के जिला मंत्री एवं सिमरी बख्तियारपुर नगर संयोजक मंगल शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने नगर परिषद पर मनमाने ढंग से योजनाएं चलाकर सरकारी धन की लूट का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। साथ ही दोषी पदाधिकारियों और संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की अपील की है।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर लग रहे आरोपों की सच्चाई सामने आ पाती है या नही।

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