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*जितेन्द्र कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ‘बिहार मतदान से लोकतंत्र तक” का हुआ लोकार्पण*

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/बिहार की राजनीति केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव, लोकतांत्रिक चेतना, राजनीतिक संघर्ष और जनभागीदारी की एक लंबी यात्रा भी है। इसी यात्रा को तथ्यों और ऐतिहासिक घटनाक्रमों के माध्यम से समझने का प्रयास जितेन्द्र कुमार सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ‘बिहार मतदान से लोकतंत्र तक” किया गया है। इस पुस्तक का लोकार्पण मंगलवार को विशाल आदित्य अपार्टमेंट में महालेखाकार बिहार से सेवानिवृत्त सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर (Sr. A.O.) शशिभूषण प्रसाद ने किया। उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु की सराहना करते हुए इसे बिहार के राजनीतिक इतिहास को समझने के लिए उपयोगी और पठनीय संदर्भ ग्रंथ बताया।

स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के बाद बिहार ने देश की राजनीति को कई महत्त्वपूर्ण विचार, नेतृत्व और प्रयोग दिए हैं। पुस्तक में वर्ष 1952 के प्रथम विधानसभा चुनाव से लेकर 2025 तक हुए सभी विधानसभा चुनावों का क्रमबद्ध एवं विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

इस पुस्तक की खासियत यह है कि इसमें बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, जन-आकांक्षाओं, राजनीतिक संघर्षों और गठबंधन सरकारों की भूमिका जैसे विषयों को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक का महत्त्वपूर्ण पक्ष बिहार की शासन व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व का क्रमबद्ध परिचय है। इसमें राज्य के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों तथा उपमुख्यमंत्रियों के कार्यकाल और राजनीतिक विकास में उनके योगदान से संबंधित जानकारी संकलित की गई है। इससे पाठकों को यह जानने में मदद मिलती है कि अलग-अलग दौर में राज्य का नेतृत्व किन परिस्थितियों में सामने आया और शासन व्यवस्था ने किस प्रकार बदलावों का सामना किया।

लोकार्पण के अवसर पर शशिभूषण प्रसाद ने कहा कि पुस्तक में देश की आजादी से लेकर वर्ष 2026 तक की सरकारों से संबंधित जानकारी का शोधपरक संग्रह प्रस्तुत किया गया है। इसमें राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों से जुड़ी सामग्री को सरल एवं पठनीय रूप में संकलित किया गया है। उन्होंने पुस्तक की उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए लेखक को उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की शुभकामनाएं दी।

सरल भाषा, कालानुक्रमिक प्रस्तुति और विषयों के व्यवस्थित संकलन के कारण यह पुस्तक विभिन्न वर्गों के पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों, राजनीतिक विश्लेषकों और बिहार के इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को इससे महत्त्वपूर्ण संदर्भ सामग्री प्राप्त होगी। विशेष रूप से सामान्य अध्ययन और भारतीय राजनीति का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए बिहार के विधानसभा चुनावों का ऐतिहासिक क्रम समझना उपयोगी है। पुस्तक चुनावी परिणामों के साथ राजनीतिक घटनाक्रमों और शासन व्यवस्था के विकास को जोड़कर देखने का अवसर प्रदान करती है।

विशाल आदित्य अपार्टमेंट में आयोजित लोकार्पण समारोह में एलन के गणित के प्रोफेसर अमित सिन्हा, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जुड़े धर्मेश कुमार, सरकार में कार्यरत धीरज, अभियंता प्रशांत कुमार सिन्हा,अभियंता शिवम राणा, संजय कुमार सिन्हा सहित अन्य लोगों की सहभागिता रही। उपस्थित लोगों ने लेखक को बधाई देते हुए पुस्तक को समाज और अध्ययन जगत के लिए उपयोगी बताया।

यह पुस्तक बिहार के चुनावी इतिहास को प्रस्तुत करती है। अतीत की राजनीतिक घटनाओं और सामाजिक परिवर्तनों का अध्ययन वर्तमान की चुनौतियों को समझने तथा भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने में सहायक हो सकता है। इस दृष्टि से पुस्तक बिहार के लोकतांत्रिक विकास को जानने और समझने के इच्छुक पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में सामने आई है।
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