ठाकुरगंज : शिलान्यास के करीब एक साल बाद भी विवाह मंडप का निर्माण शुरू नहीं, अतिक्रमण बना बाधा, कचरे के ढेर से बीमारी का खतरा

किशनगंज, 11 अक्टूबर (के.स.)। फ़रीद अहमद, जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत कादोगांव बाजार में विवाह मंडप निर्माण की योजना सरकारी व्यवस्था और अतिक्रमण के सवालों के बीच अटकी हुई है। बताया जा रहा है कि विवाह मंडप का शिलान्यास हुए करीब एक वर्ष होने को है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
पंचायत मुखिया प्रतिनिधि रसमुद्दीन फैज के अनुसार, विवाह मंडप निर्माण में सबसे बड़ी बाधा स्थल पर कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर दुकानें लगाए जाने से उत्पन्न हुई है। उनका कहना है कि विवाह मंडप निर्माण की जानकारी मिलने के बाद कुछ लोगों ने शिलान्यास स्थल पर दुकानें लगानी शुरू कर दीं, जिससे सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है।
मुखिया प्रतिनिधि का दावा है कि इस संबंध में विभागीय आदेश भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि, अतिक्रमण से संबंधित आरोपों और निर्माण में देरी की आधिकारिक स्थिति की संबंधित विभाग से पुष्टि होना बाकी है।
अतिक्रमण के साथ गंदगी भी बनी चिंता का विषय
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि बाजार के बीचोंबीच अतिक्रमण और नियमित सफाई नहीं होने के कारण कचरा जमा रहता है। कचरे के ढेर से दुर्गंध फैलने और मच्छरों के पनपने की आशंका है, जिससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल-आखिर कब शुरू होगा निर्माण?
करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद विवाह मंडप का निर्माण शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। यदि निर्माण के लिए विभागीय स्तर पर आदेश जारी हो चुका है, तो अब तक स्थल को अतिक्रमणमुक्त कराने की दिशा में क्या कार्रवाई की गई? सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण की जांच किस स्तर पर लंबित है? और बाजार में जमा कचरे की सफाई की जिम्मेदारी किसकी है?
अब संबंधित विभाग, अंचल प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे मामले की स्थल जांच कर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करें, नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करें और विवाह मंडप निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं। साथ ही, बाजार में जमा कचरे की तत्काल सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को गंदगी से राहत मिल सके।
विवाह मंडप जैसी सार्वजनिक सुविधा का उद्देश्य आम लोगों को लाभ पहुंचाना है। ऐसे में निर्माण में हो रही देरी का समाधान निकालना और सरकारी योजना को धरातल पर उतारना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं।



