14 सितम्बर सोमवार को होगा हरितालिका तीज एवं मिथिला का विशिष्ट पर्व चौठचंद्र पूजा : पंडित तरुण झा

सहरसा, 11 सितंबर (के.स.)। अजय कुमार, ब्रज किशोर ज्योतिष संस्थान एवं फाउंडेशन डॉ रहमान चौक सहरसा बिहार के संस्थापक एवं मिथिला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित तरुण झा जी ने बताया है की मिथिला में विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार हरितालिका तीज व्रत एवं चौरचन 14 सितम्बर क़ो है।इस दिन भगवान गणेश की पूजा अवश्य होनी चाहिये। विघ्नहर्ता की कृपा बनी रहती है,साथ ही बताते चलें की भगवान वराह का अवतार दिवस भी इसी दिन है, भगवान वराह ने दुष्ट हिरणयाक्ष का वध किया था।
हरितालिका तीज में डाली 07.28 मिनट सुबह में तृतीया तिथि में भरा जाना जाये तो सर्वश्रेष्ठ अन्यथा उदया तिथि के अनुसार सूर्यास्त तक डाली भरा जा सकता है।इस दिन सुहागिन औरतें अपने पति की लंबी आयु संतान की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव के साथ माँ पार्वती की पूजा करती है पूजा के समय हरितालिका तीज की व्रत कथा भी अवश्य पढ़नी चाहिए ।मिथिला का अति विशिष्ट पर्व भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी चंद्र पूजा के लिए 14 सितम्बर सोमवार को संध्या बेला में मनाया जायेगा।
पंडित तरुण झा के अनुसार जैसे कि सूर्य देव की आराधना करने के लिए छठ पर्व मनाए जाते हैं तो इसी तरह चंद्र देव की आराधना करने के लिए चौरचन का त्योहार मनाया जाता है चौरचन में चन्द्रमा की पूजा संध्या काल में होती है इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रती व्रत रखती हैं शाम में चावल पीसकर पीठार से अरिपण तैयार की जाती है इस त्योहार पर मीठे पकवान खीर, मिठाई और फल आदि रखे जाते हैं इस त्योहार में छाछी के दही का बहुत ज्यादा महत्व है।चतुर्थी में चंद्रमा की पूजा की जाती है।इसके बाद पकवानों की डाली और फल की डाली एवं छाछी वाले दही के बर्तन चंद्र देव को भोग लगाये जाते हैं।
डाली को उठाकर ये मंत्र पढ़ना है :
सिंह प्रसेन मवधीत्सिंहो जाम्बवताहत :
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तक :
दही को उठा ये मंत्र पढना है :
दिव्यशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम्
नमामि शशिनं भक्त्या शंभोर्मुकुट भूषणम्



