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*कला एवं संस्कृति के संरक्षण और कलाकारों के सम्मान के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध*

त्रिलोकी नाथ प्रसाद। राज्य सरकार कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कलाकारों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में कई महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं, जिनका सीधा लाभ कलाकारों, युवाओं और आम जनता को मिल रहा है। पेश हुए बिहार बजट में भी सरकार की तरफ़ से विभाग को पर्याप्त फण्ड की व्यवस्था की गई है जिससे इन
कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कमी ना आए।

बिहार सरकार ने कला के क्षेत्र में जीवन भर योगदान देने वाले वरिष्ठ, उपेक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों के लिए ‘मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पात्र कलाकारों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन सहायता दी जा रही है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। इसमें अब तक पटना, सारण, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, बांका, भोजपुर, अररिया, जहानाबाद और किशनगंज जिलों के कुल 85 कलाकारों का चयन किया जा चुका है।

इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना’ के माध्यम से पारंपरिक लोक कला, संगीत, नृत्य और वादन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अनुभवी कलाकारों को गुरु और युवाओं को शिष्य बनाकर नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार की ओर से गुरु को 15,000 रुपये, संगतकार को 7,500 रुपये और शिष्य को 3,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जा रही है।

इसी कड़ी में सांस्कृतिक गतिविधियों को जिला स्तर पर सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘अटल कला भवन निर्माण योजना’ के तहत सभी जिला मुख्यालयों में 620 दर्शक क्षमता वाले आधुनिक कला भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अबतक सारण, गया, पूर्णिया, सहरसा, बेगूसराय, मुंगेर और दरभंगा में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि अन्य जिलों में कार्य प्रगति पर है।

एक ओर जहां वैशाली में 550.48 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप’ को आम जनता के लिए खोल दिया गया है। वहीं, बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024 के तहत सिर्फ दो सालों में 30 से अधिक फिल्मों और वेब सीरीज को शूटिंग की अनुमति दी गई है।

इसके अलावा ‘ज्ञान भारतम्’ मिशन के तहत पाण्डुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइज के लिए केंद्र सरकार के साथ एमओयू किया गया है, जिससे बिहार की समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सकेगी।

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