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वाराणसी से सिलीगुड़ी तक रफ्तार का नया अध्याय: किशनगंज बनेगा हाई-स्पीड रेल का प्रमुख केंद्र

किशनगंज,03फरवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, केंद्रीय बजट में घोषित वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर ने पूर्वी भारत की रेल कनेक्टिविटी को एक नई दिशा दे दी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को तेज़ रफ्तार से जोड़ेगी, बल्कि किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले को विकास के नए मानचित्र पर स्थापित करने की पूरी क्षमता रखती है।

करीब 700 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिस पर भविष्य में 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेनें दौड़ेंगी। इससे वाराणसी से सिलीगुड़ी तक की यात्रा, जो अब कई घंटों में पूरी होती है, कुछ ही समय में संभव हो सकेगी।

बिहार के दिल से होकर गुजरेगी रफ्तार की रेल

यह कॉरिडोर बिहार के कई प्रमुख रेलवे शहरों-बक्सर, आरा, पटना, कटिहार और किशनगंज-से होकर गुजरेगा। रेल विशेषज्ञों की मानें तो इससे बिहार की रेल कनेक्टिविटी ऐतिहासिक रूप से मजबूत होगी। विशेष रूप से किशनगंज, जो अब तक भौगोलिक दूरी के कारण मुख्यधारा से थोड़ा अलग रहा है, इस परियोजना से सबसे अधिक लाभान्वित होगा।

हाई-स्पीड रेल के आगमन से किशनगंज एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट और आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार—हर क्षेत्र में इसके सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे।

पर्यटन और व्यापार को मिलेगा नया पंख

वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे प्रमुख धार्मिक, प्रशासनिक और व्यापारिक शहर अब किशनगंज से कहीं अधिक नजदीक होंगे। इससे न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि पर्यटन और माल ढुलाई सेवाओं को भी बड़ी राहत मिलेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आर्थिक गतिविधियों को यह कॉरिडोर नई गति देगा।

पूर्वोत्तर भारत की ओर बढ़ती हाई-स्पीड रेल

इस महत्वाकांक्षी योजना को और विस्तार देने की भी तैयारी है। भविष्य में वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को गुवाहाटी तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे पूर्वोत्तर भारत को देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से सीधे जोड़ा जा सकेगा।

पूर्वोत्तर के लिए रिकॉर्ड रेल बजट

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2026–27 के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को 11,486 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया है। यह राशि वर्ष 2014 की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में 72,468 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जो इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के बड़े बदलाव का संकेत देती हैं।

नई रेल लाइनों के सर्वे, लंबी दूरी की कनेक्टिविटी और हाई-स्पीड कॉरिडोर जैसी योजनाएं यह साफ दर्शाती हैं कि आने वाले वर्षों में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत रेल विकास के नए युग में प्रवेश करने जा रहा है।

किशनगंज के लिए सुनहरा अवसर

रेलवे जानकारों के अनुसार, वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा किशनगंज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह परियोजना न केवल यात्रा को तेज़ और सुविधाजनक बनाएगी, बल्कि जिले के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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