किशनगंज : जिले के सदर अस्पताल से हृदयरोग से पीड़ित 08 बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए आज भेजा गया पटना।

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किशनगंज/धर्मेन्द्र सिंह, जिले में लोगों को बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने को लेकर जहाँ स्वस्थ विभाग एवं जिला प्रशाशन पूरी तरह गंभीर है, वहीं, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए आरबीएसके टीम की पहल पर जिले के हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है। जिसका सार्थक परिणाम यह है कि समुचित इलाज और स्वस्थ्य होने की उम्मीद छोड़ चुके पीड़ित बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो रहे और बच्चों को नई स्वस्थ जिंदगी जीने का अवसर मिल रहा है। ऐसे पीड़ित बच्चों का जिले के आरबीएसके टीम द्वारा स्क्रीनिंग कर चिह्नत किया जा रहा और आवश्यकता के अनुसार समुचित इलाज के लिए पटना या अहमदाबाद भेजा जा रहा है। जहाँ बच्चों का सरकारी स्तर से निःशुल्क समुचित इलाज हो रहा है। इसी कड़ी में आरबीएसके टीम द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों में हृदयरोग से पीड़ित कुल आठ ऐसे बच्चे की पहचान की गई है। सभी बच्चे को मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत सरकारी खर्च से गुरुवार को स्क्रीनिंग (समुचित जाँच) के लिए आईजीआईसी (पीएमसीएच) पटना भेजा गया। जहाँ स्क्रीनिंग के बाद आवश्यकतानुसार आगे की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी एवं सभी बच्चों की पूरी तरह निःशुल्क समुचित जाँच और इलाज होगा। सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने बताया की जिले के कुल 08 बच्चो को आरबीएसके टीम द्वारा स्क्रीनिंग कर चिह्नत कर आईजीआईसी (पीएमसीएच) पटना भेजा गया है जिसमे कोचाधामन प्रखंड के 5 वर्षीय बच्ची लाडली बेगम, 30 माह की बच्ची आयशा प्रवीन, 26 माह की आयेशा अली, दिघलबैंक प्रखंड की 7 वर्षीय ललिता हंसदा, 9 वर्षीय रेशमा खातून, किशनगंज प्रखंड की 14 वर्षीय बच्ची निखत खातून, 13 वर्षीय बच्चा सुबोल कुमार शर्मा, एवं बहादुरगंज प्रखंड के 6 वर्षीय बच्चा शादिक आलम शामिल है, सभी बच्चो के साथ उनके अभिभावकों को भी भेजा गया है। सभी बच्चों को सदर अस्पताल परिसर से एम्बुलेंस से गुरुवार को पटना के लिए रवाना किया गया है। वहीं, उन्होंने बताया, सभी बच्चे को आने-जाने समेत सभी सुविधाएं यानी समुचित इलाज की सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। सभी बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों का भी खर्च सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया, जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को साँस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। जिसके कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है। ऐसे बच्चों का आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) द्वारा इलाज कराया जाता है। आरबीएसके कंसल्टेंट डाॅ ब्रहमदेव शर्मा ने कहा कि हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में आरबीएसके टीम से संपर्क कर निःशुल्क समुचित स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिला सकते हैं। जानकारी उपलब्ध कराने के पश्चात आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, इस समस्या से पीड़ित बच्चों के स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी है। अन्यथा, परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिन बच्चों के होठ कटे हैं, उसका 03 सप्ताह से 03 माह के अंदर, जिसके तालु में छेद (सुराग) है, उसका 06 से 18 माह एवं जिसका पैर टेढ़े-मेढ़े है, उसका 02 सप्ताह से 02 माह के अंदर शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इसलिए, जो उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे हैं, उसके अभिभावक अपने बच्चों का आरबीएसके टीम के सहयोग से समय पर मुफ्त इलाज शुरू करा सकते हैं।

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