किशनगंज : रुईधासा महाकाल मंदिर में कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, मां शैलपुत्री की हुई पूजा-अर्चना
वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा मंदिर परिसर, सुबह से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे श्रद्धालु, नौ दिनों की आराधना का लिया संकल्प

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
किशनगंज, 11 अक्टूबर (के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, शहर के रुईधासा स्थित महाकाल मंदिर में रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र की पूजा-अर्चना शुरू हुई। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की गई। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जबकि संध्या में मां की आरती का आयोजन किया गया। यहां मां दुर्गा के साथ महाकाल बाबा की भी पूजा-अर्चना की जाती है।
मंदिर के पुरोहित गुरु साकेत ने वैदिक मंत्रों के साथ मां शैलपुत्री की आराधना कराई। उन्होंने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना यानी कलश स्थापना कर श्रद्धालु नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री की उपासना से जीवन में सुख, शांति, साहस और स्थिरता प्राप्त होती है।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं मां शैलपुत्री
गुरु साकेत ने बताया कि मां शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। उनका वाहन वृषभ है। माता अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा के नाम से भी जाना जाता है। पार्वती और हेमवती उनके अन्य नाम हैं।
भगवान शिव के अपमान से आहत होकर सती ने त्यागे थे प्राण
पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री पूर्वजन्म में प्रजापति दक्ष की पुत्री सती थीं। दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया था। पति के समझाने के बावजूद सती यज्ञ में पहुंचीं, जहां उन्हें अपने पिता और अन्य परिजनों की ओर से अपमान का सामना करना पड़ा। भगवान शिव के अपमान से आहत होकर सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं। बाद में उनका विवाह भगवान शिव से हुआ और वे उनकी अर्द्धांगिनी बनीं।
नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।



