किशनगंज : सिमटता जा रहा ‘रमजान नदी, लगा भूमाफियाओं की नजर..

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किशनगंज/धर्मेन्द्र सिंह, सीमांचल का जिला है किशनगंज और यहां कि लाइफ लाइन मानी जाती है रमजान नदी। यह नदी शहर के बीचोबीच बहती है पहले इसका स्वरुप काफी मनमोहक था और पूरे शहर के जलस्तर को सही रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी लेकिन सरकरी अनदेखी की वजह से यह सिमटता चला गया। इसका पानी प्रदूषित हो चुका है और अब अतिक्रमणकारी की भी बुरी नजर इस पर है। हालांकि स्थानीय लोग इसके प्रति चिंतित है और ‘रमजान बचाओ संघर्ष समिति’ के माध्यम से लगातार इसे बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब हो कि शहर के बीचों बीच रमजान नदी शहर को दो भागों में विभक्त करती है। रमजान नदी की अविरल जलधारा तो सूख गयी। लेकिन कुछ वर्षों से नदी की जमीन पर भूमाफियाओं की नजर पड़ गयी। अब जमीन का अतिक्रमण कर बेच देने व घर बनाए जाने से नदी नाला में तब्दील हो गयी है। नदी की जमीन की तलहटी में कई आलीशान आशियाने खड़े हो गये है। नदी की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने व सौदर्यीकरण का पूर्व के डीएम द्वारा कई बार प्रयास किया गया। सांसद व विधायक ने भी आवाज उठायी। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। पिछले साल तत्कालीन एसडीओ शहनवाज अहमद नियाजी के नेतृत्व में रमजान नदी के जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल शुरु हुई थी। जिसमें मोहिउद्दीनपुर में नदी की जमीन पर बनाए गए मकान की मापी भी कराई गयी। नदी की जमीन खाली कराने को लेकर 160 लोगों को नोटिस भी भेजा गया। लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पिछले साल सांसद डॉ. जावेद आजाद ने भी बुडको के अधिकारी के साथ रमजान नदी के सौंदर्यीकरण को लेकर निरीक्षण किया था। लेकिन सौंदर्यीकरण का मामला भी अब फाइलों में सिमट कर रह गया है। नदी को अतिक्रमण मुक्त कर धारा को अविरल बनाने व नदी के सौंदर्यीकरण की योजना तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्व. तस्लीमुद्दीन ने बनायी थी। तब योजना आयोग की टीम भी किशनगंज पहुंची थी। नदी किनारे पार्क, नदी में मछली पालन, बोटिंग आदि की योजना बनायी गयी थी जो फाइलों में दफन होकर रह गयी।

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