आज दिनांक 5 अप्रैल 2025 को जदयू मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी के कई वरीय नेता एवं प्रवक्ता शामिल हुए। इस प्रेसवार्ता के महत्वपूर्ण बिन्दु इस प्रकार है…

मुकेश कुमार/ऽ वक्फ संशोधन बिल जनता दल (यूनाइटेड) के महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करने के बाद पारित हुआ। हमारे सुझाव थे दृ 1. जमीन राज्य का मामला है, इसलिए नए कानून में भी ये प्राथमिकता बरकरार रहे, 2. नया कानून पूर्वप्रभावी नहीं हो, 3. अगर वक्फ की कोई सम्पत्ति रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन उस पर कोई धार्मिक भवन मसलन मस्जिद, दरगाह आदि बनी हो तो उससे कोई छेड़छाड़ न की जाये और उसका स्टेटस बरकरार रखा जाये, 4. वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए जिलाधिकारी से ऊपर के अधिकारी को अधिकृत किया जाये, 5. वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति के डिजिटलाइजेशन के लिए छह महीने की समय-सीमा बढ़ाई जाये आदि। इन संशोधनों के बाद शंका की कोई बात रह ही नहीं जाती।
ऽ हैरानी की बात है कि राजद ने वक्फ संशोधन बिल पर जे0पी0सी0 को कोई सुझाव दिया ही नहीं।
ऽ वक्फ संशोधन बिल आने से बहुत पहले माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने वक्फ की चिन्ता की और बिहार में वक्फ विकास बोर्ड की स्थापना की। इसके तहत 110 करोड़ का वित्तीय आवंटन किया गया, जिससे अल्पसंख्यक छात्रावास, विवाह भवन, मल्टी पर्पस बिल्डिंग आदि का निर्माण संभव हुआ।
ऽ वक्फ की सम्पत्ति के विकास का नज़ीर देखना हो तो पटना के अशोक राजपथ स्थित अंजुमन इस्लामिया हाॅल को देखा जा सकता है।
ऽ कब्रिस्तान की घेराबंदी, हुनर और औजार योजना, परित्यक्ता नारी के लिए पेंशन, तालीमी मरकज, मदरसों को मान्यता, मदरसा में कार्यरत शिक्षकों की सेवा-शर्तों में सुधार, अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए निःशुल्क कोचिंग जैसी योजनाओं ने मुसलमानों का नीतीश जी पर भरोसा बढ़ाया। उनके शासनकाल में अल्पसंख्यक कल्याण का बजट 282 गुणा बढ़ा।
ऽ तथाकथित सेक्यूलर लालू जी ने भागलपुर के दंगाइयों को बचाने का राजनीतिक कुकृत्य किया। साथ ही उनके कार्यकाल में 12 साम्प्रदायिक दंगे हुए। उदाहरणस्वरूप, 1992 में केवल सीतामढ़ी में 48 लोग मारे गए। क्या राजद यह बताएगा कि दंगे में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई?
ऽ माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने के मामले में कितने संजीदा हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण ये है कि कांग्रेस के राज में भागलपुर में 1989 में हुए दंगे के जिन गुनहगारों को लालू-राबड़ी शासनकाल में 15 वर्षों तक बचाया जाता रहा, उनलोगों को बिहार की बागडोर संभालने के बाद श्री नीतीश कुमार जी ने सजा दिलाने और पीड़ितों को न्याय और पेंशन देने का काम किया।
ऽ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आजाद हिन्दुस्तान में केवल एक राजनेता श्री नीतीश कुमार जी हैं जो अल्पसंख्यक भाई-बहनों और उनके परिवार को, जो कांग्रेस काल में और लालू-राबड़ी शासनकाल में हुए दंगों के कारण नवंबर 2005 तक विस्थापित रहे, उनको उनके जमीन और घर पर कब्जा दिलवाया। कांग्रेस बताए कि पूरे देश में उनके शासनकाल में क्या विस्थापित दंगा पीड़ितों को कहीं बसाया गया?
ऽ श्री नीतीश कुमार जी के रहते कोई ऐसी ताकत नहीं जो बिहार में अल्पसंख्यकों के हितों, उनकी सुरक्षा, उनके अधिकार और उनके मान-सम्मान से कोई छेड़छाड़ कर सके। सर्वधर्म समभाव और पूरा बिहार हमारा परिवार की सोच से श्री नीतीश कुमार डिग जाएं, ये संभव ही नहीं।
ऽ श्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के मसले पर आज तक ना तो कोई समझौता किया है, ना करेंगे। अल्पसंख्यक समाज की आस्था उनमें थी, है और हमेशा रहेगी।
उक्त संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से राष्ट्रीय महासचिव जनाब अफाक अहमद खान, स0वि0प0, जनाब गुलाम गौस, स0वि0प0, जनाब खालिद अनवर, स0वि0प0, जनाब अहमद अशफाक करीम, पूर्व सांसद (रास), मोहतरमा कहकशां परवीन, पूर्व सांसद (रास), जनाब सलीम परवेज, पूर्व उपसभापति, बि0वि0प0, सुन्नी बोर्ड के अध्यक्ष जनाब मो0 इरशादुल्लाह, शिया बोर्ड के अध्यक्ष जनाब सैय्यद अफजल अब्बास, प्रदेश प्रवक्ता मोहतरमा अंजुुम आरा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रभारी जनाब मेजर इकबाल हैदर, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष जनाब अशरफ अंसारी, प्रदेश महासचिव मोहतरमा आसमां परवीन, मद्रसा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जनाब अब्दुल कय्यूम अंसारी, वरीय नेता जनाब इमामउद्दीन राईन, मीडिया पैनलिस्ट जनाब अकबर अली आदि उपस्थित रहे।