नवेंदु मिश्र
जयपुर – राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में सूखे के हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों की सूची से बाहर रह गए इलाकों में दोबारा निष्पक्ष सर्वेक्षण एवं गिरदावरी करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 41 जिलों एवं 426 तहसीलों में से केवल 14 जिलों की 80 तहसीलों को “गंभीर और मध्यम” सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में भी किसान सूखे के कारण फसल खराब होने, कुओं के सूखने और आर्थिक संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों से लगातार किसानों की आवाज़ उठ रही है, लेकिन उन्हें अभी तक सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
श्री गहलोत ने कहा कि बांसवाड़ा की शेरगढ़ तहसील और जोधपुर जिले की भोपालगढ़ तहसील के किसानों ने भी मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याएं सामने रखी हैं। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं, जहां बारिश की कमी और फसलों को हुए नुकसान के कारण किसान परेशान हैं। ऐसी स्थिति में ज़रूरी है कि सरकार केवल घोषित सूखाग्रस्त क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे प्रदेश के ज़मीनी हालात का निष्पक्ष आकलन करवाए।
श्री गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि बारिश की कमी, फसलों को हुए नुकसान और वास्तविक ज़मीनी परिस्थितियों को आधार बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा निष्पक्ष सर्वेक्षण एवं गिरदावरी करवाई जाए। जिन क्षेत्रों में सूखे के हालात पाए जाते हैं, उन्हें भी तत्काल सूखाग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जाए, ताकि वहां के किसानों को भी चारा, पेयजल, रोज़गार और मुआवज़े सहित आवश्यक राहत उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में किसानों को राहत देने के लिए समय पर सही आकलन और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना बेहद ज़रूरी है।
ज्ञात हो कि हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री श्री गहलोत ने जैसलमेर, फलोदी, जोधपुर तथा उससे पहले बीकानेर के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा किया था। उन्होंने किसानों एवं पशुपालकों से उनके अभाव एवं पीड़ा के बारे में चर्चा की थी तथा राज्य सरकार से अविलंब राहत कार्य शुरू करने की मांग की थी।


