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पटना : लीची किसानों और व्यापारियों की समस्या का मुख्यमंत्री अविलम्ब निदान:-ललन

पटना/त्रिलोकीनाथ प्रसाद, कोरोना संकट मे जारी लॉकडाउन ने लीची किसानों और व्यापारियों की समस्या का मुख्यमंत्री अविलम्ब निदान करायें।अन्यथा प्रदेश को अनुमानतः10 हजार करोड़ की आर्थिक क्षति होगी।बिहार युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ललन कुमार ने कहा कि लीची की फसल तैयार होने में कम ही समय रह गया है लेकिन आरा मशीन के बंद रहने से इसकी पैकैजिंग के लिए बक्से बनाने का काम नहीं शुरू हुआ है।लीची के पैकेजिंग के लिये आमतौर पर लकड़ी के बक्से का प्रयोग होता है।उन्होंने कहा कि इस साल लीची की फसल अनुकूल मौसम के कारण काफी अच्छी है।आम तौर पर 15 से 20 मई के बीच शाही लीची पक कर तैयार होता है लेकिन मई के पहले सप्ताह से ही मुजफ्फरपुर के शाही लीची को तोड़ने का काम व्यापारी शुरू कर देते हैं।लेकिन कोरोना संकट के कारण देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण इस साल व्यापारियों को लीची को दूसरे राज्यों में भेजने पर अभी से संकट दिखाई पड़ रहा है।ललन ने कहा कि देश के कुल लीची उत्पादन का 40 फीसदी उत्पादन सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले में होता है।देश में 5 लाख टन लीची का उत्पादन होता है।जिसमें बिहार देश का 70 फीसदी लीची उत्पादन करता है जिसमें से अकेले 40 फीसदी लीची मुजफ्फरपुर में होती है।यानि बड़े पैमाने पर लीची की बागवानी नकदी फसल के विकल्प के तौर पर किसान लीची की बागवानी करते हैं।युवा कांग्रेस नेता ने कहा कि 10 हजार करोड़ की इकोनॉमी लीची की बागवानी से जुड़ी हुई है जिसमें से सबसे अधिक फ्रेश लीची का कारोबार दूसरे राज्यों में लीची को भेजकर ही किया जाता है लेकिन कोरोना संकट के कारण हुए लॉक डाउन में लकड़ी के बक्से के निर्माण की अनुमति के साथ ही गाड़ियों के परमिट के बारे में किसान परेशान हो रहे हैं।

dharmendra singh

धर्मेन्द्र सिंह प्रिंट माध्यम में 17 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं।राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है।

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