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आरोपों से बचाव में ही बीत गया संसद सत्र निशिकांत ठाकुर

नीलेंदु कुमार झा/संसद का बजट सत्र सत्तापक्ष और विपक्ष के हंगामे के बीच खत्म हो गया। हंगामे को देखकर और संसद से छनकर आए समाचारों की मानें तो सत्तापक्ष पर विपक्ष हावी रहा और पूरे सत्र में बजट के अतिरिक्त देशहित में कुछ खास काम नहीं हो सका। देश और संसद में सबसे चर्चित और विवादित विषय जेफ्री एप्सटिन की वह फाइल रहा जिसे अमेरिकी जस्टिस विभाग ने लाखों पन्नों का जारी किया है। अमेरिकी जस्टिस विभाग की ओर से जारी उस फाइल में विश्व के साथ ही भारत के भी कई कई जाने—माने नेता, उद्योगपति तथा देश के कथित ‘कर्णधारों’ के नाम शामिल प्रतीत होते हैं जिनपर हमारे संविधान के दायरे में रहकर जनता ने देश को मजबूत करने का दायित्व सौंपा है। विश्व मीडिया की मानें तो इस फाइल के सार्वजनिक होने पर विश्व के कई धुरंधर नेता स्वयं को दोषी मानते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे चुके हैं और विश्व के कई जाने—माने चेहरे अपना मुंह छुपाते हुए अंधेरे का कोई कोना ढूंढ रहे हैं ।

ऐसे में इस मामले में सबसे पहले समझने का प्रयास करते हैं कि आखिर यह अमेरिकी नागरिक जेफ्री एप्सटिन है कौन और उसके किस कृत्य ने आज विश्व को झकझोर दिया है। जेफ्री एपस्टीन (1953–2019) एक अमेरिकी फाइनेंसर, यौन अपराधी और सेक्स ट्रैफिकर (यौन तस्कर) था, जो उच्च-स्तरीय सामाजिक संपर्कों के लिए जाना जाता था। उसने नाबालिगों के यौन शोषण के लिए एक बड़ा नेटवर्क बनाया था, जिसके बाद 2019 में गिरफ्तारी के बाद न्यूयॉर्क की जेल में उसने आत्महत्या कर ली थी। उसने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की, लेकिन बाद में फाइनेंस और बैंकिंग क्षेत्र में आ गया, जहां उसने अरबपतियों को सलाह देकर संपत्ति बनाई। 2005 में उसके खिलाफ यौन शोषण की जांच शुरू हुई थी। 2008 में उसने वेश्यावृत्ति के लिए एक नाबालिग को उकसाने का अपराध स्वीकार किया था। नाबालिगों की यौन तस्करी के नए संघीय आरोपों में फिर उसे गिरफ्तार किया गया था। 10 अगस्त, 2019 को वह जेल में मृत पाया गया, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या माना गया, लेकिन उसकी मृत्यु काफी विवादित रही। भारत में इसकी चर्चा इसलिए गर्म है, क्योंकि हाल ही में जारी कोर्ट के दस्तावेजों में कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम सामने आए हैं, जिससे भारतीय सोशल मीडिया पर उनके संबंधों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। एपस्टीन के दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद इन दस्तावेजों का भारत के कुछ वर्ग अपने अपने तरीके से सोशल मीडिया पर विश्लेषण कर रहे हैं। लोगों में इस बात को लेकर जिज्ञासा है कि क्या इन रसूखदार लोगों की सूची में कोई भारतीय नाम या उससे जुड़ा कोई तार भी शामिल है?

फरवरी 2026 में बजट सत्र के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एपस्टीन फ़ाइलों का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर उन फाइलों से जुड़े होने का गंभीर आरोप लगाया। राहुल गांधी ने इसे लेकर सरकार की तीखी आलोचना की और इस मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा छह सवाल भी पूछे गए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइलों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर ‘प्रत्यक्ष दबाव’ है। हरदीप पुरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विपक्षी नेता राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल कुछ मौकों पर एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थी और उनके साथ सिर्फ एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को निराधार बताया और कहा कि राहुल गांधी के भाषण की गलत बातों को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव और तीखी बहस देखने को मिली।

संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसदों ने जेफ्री एपस्टिन विवाद को लेकर बड़े—बड़े बैनर और पोस्टर भी लहराए। लोकसभा में विपक्ष दल के नेता राहुल गांधी के सदन में एपस्टिन मामले से पूरी लिंक होने के आरोपों के बाद अब इसे बड़ा सियासी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। इसलिए संसद परिषद में जहां पार्टी सांसदों ने विरोध का मोर्चा संभाला, वहीं सड़क पर युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब की अगुआई में राजधानी में सड़कों पर उतरकर हरदीप पुरी को मंत्रिमंडल से निष्कासितत करने की मांग की गई। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनपर गलत सूचना फैलाने और देश में गृहयुद्ध भड़काने का आरोप लगाया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री से नफरत करते हैं और संसद में शाहीन बाग जैसा माहौल बनाना चाहते हैं। उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के लिए कहा कि उन्होंने आज तक नहीं देखा किस विपक्षी सांसदों द्वारा इस तरह का अपमानजनक और शर्मसार करने वाले शब्दावली का प्रयोग किया गया हो। रविशंकर प्रसाद ने वर्तमान सत्र की कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी ने सिख सदस्य, जो एक कैबिनेट मंत्री भी हैं, उन्हें ‘गद्दार’ कहा।

फिलहाल, संसद में अब बजट सत्र का पहला चरण खत्म हो गया है, लेकिन कुछ विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दे अनुत्तरित रह गए हैं। इनमें कुछ इस प्रकार हैं— 2026 के बजट सत्र का पहला चरण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के संस्मरण से जुड़े विवाद और राहुल गांधी के बयानों को लेकर तीखी बहस हंगामेदार रहा। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग, आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन, और विपक्षी नेताओं द्वारा सरकार की आर्थिक/विदेश नीतियों को घेरने से संसद के दोनों सदन स्थगित होते रहे। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब (संस्मरण) का हवाला देकर राहुल गांधी द्वारा 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर बहस की कोशिश पर बड़ा हंगामा हुआ, जिसके बाद विपक्ष के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया। विपक्षी दलों ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार की आलोचना की। विपक्ष द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ, जिसके कारण कार्यवाही बाधित हुई। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, मोदी सरकार की विदेश नीति, और मनरेगा में बदलाव/नाम बदलने के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। कफ सिरप से मौतें, रशियन तेल आयात, वायु प्रदूषण और केंद्रीय औद्योगिक संबंध संहिता में संशोधन से जुड़े मामले भी गरम रहे। संसद में बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी, 2026 को समाप्त हुआ और सदन अब 9 मार्च, 2026 को फिर से शुरू होगा।

 

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