किशनगंज : सरस मेला में महानंदा लीफ चाय की रही धूम, 700 किलो चायपत्ती की बिक्री, दो लाख रुपये का कारोबार
जीविका दीदियां चला रहीं टी फैक्ट्री, बन रही आत्मनिर्भरता की मिसाल

किशनगंज,05जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पटना के गांधी मैदान में आयोजित सरस मेला में किशनगंज जिले की महानंदा लीफ चाय ने खास पहचान बनाई। 12 दिसंबर से 4 जनवरी तक चले सरस मेला के दौरान महानंदा लीफ चायपत्ती की लगभग 700 किलो बिक्री हुई, जिससे करीब दो लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। किशनगंज जिला की जीविका दीदियों द्वारा तैयार महानंदा लीफ चाय को मेले में लोगों ने खूब सराहा। सरस मेला के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने महानंदा लीफ चाय के बढ़ते कारोबार को लेकर जीविका समूह को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
जीविका किशनगंज की जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जीविका दीदियों द्वारा तैयार महानंदा लीफ चायपत्ती तेजी से अपनी पहचान बना रही है। सरस मेला में हुई अच्छी बिक्री यह दर्शाती है कि लोगों को किशनगंज की चाय खूब पसंद आ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में टी बोर्ड के माध्यम से तथा जीविका के ग्रामीण बाजार, हाट-बाजार एवं अन्य मंचों पर महानंदा लीफ चाय की बिक्री की जाएगी।
उन्होंने बताया कि किशनगंज जिले में जीविका दीदियों द्वारा तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। जीविका दीदियों को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जीविका संपोषित महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा केचकेचीपाड़ा, पोठिया (किशनगंज) में टी प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग इकाई का संचालन किया जा रहा है। किशनगंज जिले में चाय पत्ता की खेती एवं पत्ता तोड़ने से जुड़ी जीविका दीदियां ही इस कंपनी का संचालन कर रही हैं। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भी जीविका दीदियां ही हैं, जो पूरी टी फैक्ट्री का प्रबंधन संभाल रही हैं। महानंदा लीफ चाय अब जिले की पहचान के साथ-साथ जीविका दीदियों के आर्थिक स्वावलंबन का मजबूत आधार बन रही है।
सरस मेला में किशनगंज सदर प्रखंड के पानीसाल गांव की पांच स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 40 जीविका दीदियों द्वारा ओखली में तैयार मसालों की भी जमकर बिक्री हुई। हल्दी, जीरा, धनिया, मिर्च आदि मसालों को पारंपरिक तरीके से ओखली में कूटकर पैकेजिंग कर बेचा गया, जिससे करीब डेढ़ लाख रुपये का कारोबार हुआ। इस कार्य से जुड़ी जीविका दीदियों को प्रतिमाह औसतन 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है।
स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर शुरू की गई यह पहल अब एक सफल उद्यम का रूप ले चुकी है। इससे न केवल जीविका दीदियों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि उनके भीतर उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का भी विकास हो रहा है।



