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उत्तरकाशी के सुरंग में फंसे मजदूर: उत्तरकाशी के सिलक्यारा गांव की सुरंग में फसी 41 मजदूरों की जिंदगियां दांव पर।…

पूनम जयसवाल:-पिछले 10 दिनों से यह मजदूर इसी सुरंग में फंसे हुए हैं और इनको सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किये जा रहे युद्ध स्तरीय प्रयासों का अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। हालांकि, एक अच्छी बात यह है कि उन सब से बातचीत हो पा रही है। मगर इस समय उनका हौसला एवं मनोबल को बढ़ाए रखना है और यह काम वहां पहुंचे उनके परिजन ज्यादा बेहतर से कर सकते हैं इन परिजनों को मौके पर सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है एवं मनोचिकित्सकों की सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस घटना से केंद्र और राज्य सरकारों को गंभीर सबक लेने की जरूरत है, क्योंकि किसी भी अनहोनी का अन्य परियोजनाओं में कार्य रत मजदूरों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसमें कोई दो राय नहीं है कि पहाड़ों को भी विकास चाहिए न सिर्फ वहां से होकर पलायन को रोकने के लिहाज से, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी यह खास जरूरी है। इसलिए उत्तरकाशी के इलाके में बढ़ती कुदरती आपदाओं का गहन अध्ययन बहुत ही आवश्यक है। वैसे तो, सुरंग मार्गों का निर्माण हमेशा से ही चुनौती पूर्ण रहा है, लेकिन प्रौद्योगिकीय तरक्की ने दुनिया के लोगों को इसके लिए प्रेरित किया है। जाहिर सी बात तो यह है कि अब तो काफी ऐसे लंबे-लंबे रास्ते बनाए बनने लगे हैं। इससे न सिर्फ आवा गमन में आसानी हुई बल्कि सुदूर इलाकों तक विकास की रोशनी पहुंचने में भी मदद मिली है।

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