पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है जल जीवन हरियाली अभियान
जल-जीवन-हरियाली दिवस पर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सभागार में हुआ कार्यक्रम

त्रिलोकी नाथ प्रसाद।जल-जीवन-हरियाली दिवस के अवसर पर मंगलवार, 3 फरवरी को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें “नए जलस्रोतों का सृजन – निजी भूमि पर चौर विकास” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी योजनाओं में से एक है। यह योजना सरकार की पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां जल संरक्षण और हरियाली के संवर्धन को केंद्रीय महत्व दिया गया है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि, आज चाहे संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा हो या केंद्रीय बजट, हर स्तर पर जलवायु परिवर्तन को प्राथमिकता दी जा रही है। जल-जीवन-हरियाली योजना इसी वैश्विक सोच के अनुरूप है, जो जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को मजबूती प्रदान करती है। इस पहल के केंद्र में पर्यावरण है और यह केवल एक योजना नहीं बल्कि एक मिशन है।
वहीं, मत्स्य निदेशक तुषार सिंगला ने बताया कि अन्य विभागों के अधीन जलकरों में मत्स्य पालन के माध्यम से न केवल आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, बल्कि जल की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा रहा है। तालाबों एवं जलकरों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मिशन मोड में सीमांकन, अतिक्रमण मुक्त कर जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है।
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इस कार्यक्रम का नोडल विभाग ग्रामीण विकास विभाग है। इस वर्ष जनवरी से दिसंबर तक प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को संबंधित विभागों द्वारा जल-जीवन-हरियाली दिवस का आयोजन किया जाना निर्धारित है। इसी क्रम में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मत्स्य प्रभाग ने कार्यक्रम का आयोजन किया था।
कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक-सह-निदेशक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एस. चंद्रशेखर, मिशन निदेशक, जल-जीवन-हरियाली सुमित कुमार,विशेष सचिव गीता सिंह तथा अपर सचिव स्मिता सिंह समेत कई अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।



