किशनगंज में नदी कटाव का मुद्दा लोकसभा में उठा, सांसद डॉ. जावेद ने मांगे ठोस उपाय
मिडिल ईस्ट युद्ध से ईंधन-गैस संकट पर भी सदन का ध्यान कराया आकर्षित
किशनगंज,01अप्रैल(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आज़ाद ने लोकसभा में नियम 377 के तहत जिले में मॉनसून के दौरान होने वाले नदी कटाव की गंभीर समस्या को उठाया। उन्होंने कहा कि हर वर्ष भारी वर्षा के कारण महानंदा, मेची, डोंक, रतुआ और कनकई नदियों का जलस्तर बढ़ने से भीषण कटाव होता है, जिससे किसानों, ग्रामीणों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान झेलना पड़ता है।
सांसद ने कहा कि कटाव के कारण हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट हो चुकी है, जिससे किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है। साथ ही कई गांवों की बस्तियां, मवेशी, सड़कें, पुल तथा तटबंध भी लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। नदियों के मार्ग बदलने से लोगों का विस्थापन बढ़ रहा है और प्रभावित परिवारों की असुरक्षा भी बढ़ती जा रही है।
उन्होंने बताया कि जिले के कई प्रखंड इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हैं, जिससे मिट्टी का क्षरण और नदी तंत्र में असंतुलन जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
सांसद ने विशेष रूप से महानंदा और मेची नदी घाटियों में कटाव रोकने के लिए ठोस और व्यापक योजना बनाने की मांग की। सांसद डॉ. जावेद ने पत्थरों की पिचिंग, कंक्रीट तटबंध निर्माण तथा वैज्ञानिक पद्धति से नदी प्रबंधन जैसे उपायों को लागू करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कटाव से प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने तथा पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए प्रभावी योजना लागू करने की मांग की।
उन्होंने जल शक्ति मंत्री से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित परिवारों की जीवन और आजीविका सुरक्षित की जा सके।
वहीं सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आज़ाद ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण देश में उत्पन्न ईंधन और एलपीजी गैस की संभावित समस्या को भी लोकसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर लोग गैस और ईंधन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं और इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
सांसद ने मांग की कि इस गंभीर मुद्दे पर सदन में चर्चा कर समाधान निकाला जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और आपूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी रहे।



