बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने पटना के पाटलिपुत्र में प्रकृतियां 2026 कार्यक्रम में भाग लिया।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद। उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा कि आज “प्रकृतिका 2026 – चौथा अनोखा बनर्जी बीज एवं खाद्य विविधता महोत्सव” के इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रहा है।
भारत सदियों से कृषि प्रधान देश रहा है। हमारी सभ्यता की जड़ें खेत-खलिहानों में, हमारे बीजों में और हमारी विविध खाद्य परंपराओं में निहित हैं। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, खाद्य असुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे महोत्सव हमें यह स्मरण कराते हैं कि समाधान हमारी अपनी धरती, हमारे देशी बीजों और पारंपरिक ज्ञान में ही छिपा हुआ है।
इस वर्ष की थीम – “लचीली खाद्य प्रणालियों के लिए माइसीलियम और ट्रेंचेस का पुनर्जीवन” – अत्यंत प्रासंगिक और दूरदर्शी है। यह थीम हमें यह संदेश देती है कि यदि हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना है, तो हमें मिट्टी की सेहत सुधारनी होगी, जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों को पुनर्जीवित करना होगा और देशी बीजों की विविधता को संरक्षित करना होगा। माइसीलियम मिट्टी की जीवनशक्ति का प्रतीक है, जो भूमि को उर्वर बनाता है, और ट्रेंचेस जल प्रबंधन का सशक्त माध्यम हैं। इन दोनों का पुनर्जीवन हमारे कृषि तंत्र को अधिक टिकाऊ और सशक्त बना सकता है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि इस महोत्सव में देश के लगभग 20 राज्यों से किसान, कृषि विशेषज्ञ, शोधकर्ता, फूड इनोवेटर, महिला समूह और युवा सहभागी बन रहे हैं। यह विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। जब किसान और वैज्ञानिक साथ बैठकर संवाद करते हैं, जब महिलाएं अपने पारंपरिक खाद्य ज्ञान को साझा करती हैं, जब युवा नवाचार के साथ जुड़ते हैं—तब एक सशक्त और आत्मनिर्भर खाद्य प्रणाली का निर्माण होता है।
बिहार की धरती सदैव कृषि और संस्कृति की समृद्ध भूमि रही है। यहाँ की मिट्टी ने अनेक पारंपरिक फसलों, मोटे अनाजों, दालों और सब्जियों को जन्म दिया है। आज आवश्यकता है कि हम अपने देशी बीजों को संरक्षित करें, जैविक खेती को बढ़ावा दें और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाएं। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आमजन को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन भी उपलब्ध होगा।
मैं विशेष रूप से महिला समूहों और युवा साथियों की भागीदारी की सराहना करता हूँ। महिलाओं ने सदैव बीज संरक्षण और पारंपरिक व्यंजनों की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं युवा पीढ़ी तकनीक और नवाचार के माध्यम से कृषि को नए आयाम दे सकती है। यदि परंपरा और तकनीक का समन्वय हो जाए, तो कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन संभव है।
आज हमें यह संकल्प लेना होगा
हम देशी बीजों की विविधता को बचाएंगे,
जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाएंगे,जल और मिट्टी के संरक्षण को प्राथमिकता देंगे,
और स्थानीय खाद्य प्रणालियों को सशक्त बनाएंगे।
मैं आयोजकों को इस सार्थक पहल के लिए हृदय से बधाई देता हूँ। “प्रकृतिका 2026” निश्चित रूप से संवाद, सहयोग और समाधान का एक सशक्त मंच सिद्ध होगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ होने वाले विचार-विमर्श और अनुभवों का आदान-प्रदान आने वाले समय में नीति-निर्माण और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगा।
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा कि प्रकृति के साथ संतुलन ही हमारे अस्तित्व की कुंजी है। यदि हम अपनी मिट्टी, अपने बीज और अपने जल स्रोतों की रक्षा करेंगे, तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।
आप सभी को इस सफल आयोजन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
वही मौके पर जस्टिस नीलू अग्रवाल, पटना नगर निगम महापौर सीता साहू, एम थॉमस, कर्नल सोमेंद्र पांडे, गुरु प्रिया सिंह, राकेश नाथ चौबे, प्रोफेसर वसी अहमद सहित अन्य मौजूद रहे।



