बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में अंत्योदय और एकात्म मानववाद के प्रणेता, असंख्य कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत, भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं महान राष्ट्रचिंतक परम श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि ‘समर्पण दिवस’ के अवसर पर उनके तैल चित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/इस अवसर पर डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने ‘अंत्योदय’ के माध्यम से समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान का जो विचार दिया, वह आज भी नीति और शासन की आधारशिला है। उनका ‘एकात्म मानववाद’ केवल एक राजनीतिक दर्शन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों पर आधारित समग्र विकास की अवधारणा है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि दीनदयाल जी का मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ नहीं पहुँचता, तब तक वास्तविक प्रगति अधूरी है। आज आवश्यकता है कि हम उनके सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए सेवा, समर्पण और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि ‘समर्पण दिवस’ हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और सुशासन के मार्ग पर चलकर उनके सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दें।
इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।इस अवसर पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्री प्रमोद कुमार एवं माननीय सदस्य श्री मिथिलेश तिवारी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

