फाइलेरिया: लाइलाज नहीं, आत्म-देखभाल से नियंत्रित होने वाली बीमारी
दिघलबैंक सीएचसी में 08 मरीजों को एमएमडीपी किट का वितरण

किशनगंज,18जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन लंबे समय तक उपेक्षित रहने वाली बीमारी है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलती है और धीरे-धीरे व्यक्ति को शारीरिक रूप से कमजोर बना देती है। इस बीमारी के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होने के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यह हाथ-पैरों की असामान्य सूजन, चलने-फिरने में परेशानी और स्थायी विकृति का कारण बन जाती है। हालांकि फाइलेरिया का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन आत्म-देखभाल, नियमित स्वच्छता और सही मार्गदर्शन से इसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से रविवार को दिघलबैंक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को आत्म-देखभाल के प्रति जागरूक किया गया।
08 मरीजों को मिली एमएमडीपी किट
कार्यक्रम के दौरान 08 फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई। किट में साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, तौलिया, टब, मग सहित दैनिक स्वच्छता एवं आत्म-देखभाल से जुड़ी आवश्यक सामग्री शामिल थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों को किट के सही उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित सफाई और देखभाल से संक्रमण की जटिलताओं को रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया भले ही पूरी तरह समाप्त होने वाली बीमारी न हो, लेकिन आत्म-देखभाल और एमएमडीपी किट के नियमित उपयोग से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक फाइलेरिया मरीज तक यह सुविधा पहुंचे और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिले।
फाइलेरिया ‘साइलेंट डिजीज’, सतर्कता ही बचाव
वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया को ‘साइलेंट डिजीज’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई वर्षों बाद सामने आते हैं। यदि मरीज रोजाना पैरों की सफाई, त्वचा की उचित देखभाल और हल्का व्यायाम करें, तो बीमारी की प्रगति को रोका जा सकता है। एमएमडीपी किट इसी आत्म-देखभाल को आसान बनाने का माध्यम है।
आत्म-देखभाल से बेहतर जीवन की उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों ने लाभार्थियों को पैरों को साफ और सूखा रखने, नियमित स्वच्छता अपनाने तथा किसी भी घाव या संक्रमण की स्थिति में तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी। यह आयोजन फाइलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जिससे मरीजों में जागरूकता बढ़ी और उन्हें बेहतर जीवन की उम्मीद।



