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*अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ के कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत हुए डॉ प्रियदर्शी आलोक*

जितेन्द्र कुमार सिन्हा,  ::प्रौद्योगिकी की परंपरा के साथ मिलकर व्यावसायिक चिकित्सा में सांस्कृतिक विविधता के साथ समन्वय बनाते हुए मरीजों की चिकित्सा करना प्रमुख कर्तव्य है।”उक्त उद्गार ‘ शिक्षा ओ अनुसंधान विश्वविद्यालय परिसर स्थित सभागार, भुवनेश्वर, उड़ीसा’ में आयोजित अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ के 63 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में AIOTA के अध्यक्ष डॉ पंकज वाजपेई ने व्यक्त किया। इस सम्मेलन में बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एवं ऑक्यूपेशनल भेरापी, विकलांग भवन अस्पताल के ऑक्यूपेशनल थेरापी विभाग के प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ० प्रियदर्शी आलोक को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य मनोनीत किया गया है।

डॉ० प्रियदर्शी आलोक यह सम्मान पाने वाले पहले बिहारी चिकित्सक हैं। यह बिहार के लिए सम्मान और गर्व की बात है। इसका कार्यकाल दो वर्षों का होता है। डॉ आलोक के साथ ही दिल्ली में कार्यरत डॉ दुर्गेश पाठक को भी कार्यकारिणी का सदस्य मनोनीत किया गया। डॉ दुर्गेश मूल रूप से बिहार के ही निवासी हैं।इस अवसर पर डॉ आलोक ने वर्ष 2027 में राष्ट्रीय ऑक्यूपेशनल थेरापी संघ का सम्मेलन बिहार की राजधानी पटना में कराने का प्रस्ताव रखा जिसे सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया।

64 वें अखिल भारतीय ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट संघ की राष्ट्रीय सम्मेलन फरवरी 2027 में पटना में कराने का निर्णय लिया गया। इस सम्मेलन का आयोजन सचिव भी डॉ प्रियदर्शी आलोक को बनाया गया।

त्रिदिवसीय (9 से 11 जनवरी 2026)सम्मेलन का उद्‌घाटन मुख्य अतिथि उड़ीसा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह सम्मेलन S V NIRTAR CUTTACK तथा Odissa Branch of ऑक्यूपेशनल थेरापी द्वारा डॉ अनुरूपा सेनापति, विभागाध्यक्ष ऑक्यूपेशनल थेरापी, कटक के कुशल नेतृत्व और वैज्ञानिक सत्र डॉ० प्रज्ञान सिंह,S V NIRTAR के नेतृ‌त्व में संयुक्तरूप से आयोजित किया गया।

इस वैज्ञानिक सम्मेलन में देश एवं विदेश से आए हुए कई विशेष‌ज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। कुल 58 वैज्ञानिक शोध – पत्र प्रस्तुत किए गए तथा पाँच विशेष‌ज्ञों ने अपने वार्ता प्रस्तुत किए। बेहतर प्रस्तुति के लिए प्रस्तुति कर्त्ताओं को प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेहतर कार्य करने वाले ऑक्यूपेशनल चिकित्सक एवं छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरापी एंड ऑक्यूपेशनल थेरापी, पटना के चिकित्सक डॉ अभय कुमार जायसवाल को भी बिहार चैप्टर में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रतीक चिह्न (मूमेंटो ) एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। उनकी अनुपस्थिति में यह सम्मान डॉ आलोक ने ग्रहण किया।

इस वर्ष के सम्मेलन का थीम Tradition of Technology:- Embracing Cultural Diversity in Occupational Therapy” पर आधारित था।

सम्मेलन की शुरुआत डॉ० पंकज वाजपेई ,अध्यक्ष अखिल भारतीय ऑक्यूपेशन‌ल थेरापी संघ के स्वागत भाषण से हुई। तत्पश्चात् डॉ जोसेफ सन्नी, सचिव, AIOTA ने संघ की विभिन्न गतिविधियों से चिकित्सकों को अवगत कराया।डॉ० प्रज्ञान सिंह चेयरपर्सन वैज्ञानिक कमिटी ने सम्पूर्ण वैज्ञानिक सत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध-पत्र की जानकारी उपस्थित चिकित्सकों को दी। अंत में 63 वें राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ अनुरूपा सेनापति ने धन्यवाद प्रस्ताव के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
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