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बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने पटना स्थित मिलर हाईस्कूल मैदान में नंदवंशी चेतना मंच द्वारा आयोजित जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के 102वें पखवारा जयंती सह सम्मान समारोह में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों और संघर्षों को याद किया।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/डॉ. प्रेम कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि विचार, संघर्ष और सामाजिक न्याय की जीवंत प्रतिमूर्ति थे। 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले के एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्म लेकर उन्होंने असाधारण जीवन जिया। उनका संपूर्ण जीवन गरीबों, शोषितों, वंचितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सादगी के प्रतीक थे। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भी उनका जीवन आम जनमानस जैसा रहा। उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनका स्पष्ट विश्वास था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास नहीं होगा, तब तक सच्चा लोकतंत्र संभव नहीं है।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में सामाजिक न्याय की नींव को मजबूत किया। पिछड़े एवं अति-पिछड़े वर्गों को आरक्षण देकर उन्होंने शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। उस समय यह निर्णय साहसिक था, लेकिन आज वही सामाजिक समानता का मजबूत आधार बन चुका है। उत्तर भारत में डॉ. राम मनोहर लोहिया के बाद वे समतामूलक समाज और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रणेता के रूप में जाने जाते हैं। चार दशकों तक उन्होंने बिहार की राजनीति को मजबूत नेतृत्व प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर जातियों को तीन श्रेणियों—पुरस्कृत वर्ग, बहिष्कृत वर्ग और तिरस्कृत वर्ग—में विभाजित कर सामाजिक असमानता को उजागर करते थे। अति-पिछड़े वर्ग के लिए वे व्यथित मन से कहा करते थे कि ये वर्ग “मनहीन, तनहीन और धनहीन” हैं। समाज में हर स्तर पर समान अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि आज कर्पूरी ठाकुर जी के अधूरे सपनों को साकार करने की दिशा में केंद्र की मोदी सरकार निरंतर कार्य कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा गठित रोहिणी आयोग की सिफारिशें लागू होने से अति-पिछड़े वर्गों को उनके सभी अधिकार और हक निश्चित रूप से प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की कथनी और करनी में कभी अंतर नहीं रहा। वे सच्चे अर्थों में “जननायक” थे, क्योंकि वे जनता से जुड़े, जनता के लिए जिए और जनता के बीच रहे। उनकी 102वीं जयंती पर हम सभी को उनके आदर्श—सादगी, ईमानदारी, समानता और सामाजिक न्याय—को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए।

अंत में डॉ. प्रेम कुमार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

वहीं मौके पर माननीय मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल जी, माननीय मंत्री रामकृपाल यादव जी, माननीय विधायक संजय गुप्ता जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदवंशी चेतना मंच आनंद कुमार जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नंदवंशी चेतना मंच अशोक ठाकुर जी, उमेश कुमार देव जी, संगीता प्रमाणिक जी, रवि शंकर प्रसाद जी, श्याम किशोर ठाकुर जी, डॉक्टर अर्जुन शर्मा जी, श्रीमती सुनीला ठाकुर जी, श्री प्रभाकांत शर्मा जी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं आमजन उपस्थित रहे।

 

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