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सहरसा : नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर के काले कारनामे — भाग 1

करोड़ों की योजनाओं में कथित लूट, नियमों को ताक पर रखकर हो रहा खेल

सहरसा,13जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिले के नगर परिषद सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र में विकास के नाम पर संचालित योजनाओं में बड़े पैमाने पर सरकारी राशि की कथित लूट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नगर परिषद द्वारा निविदा एवं विभागीय मद से करोड़ों रुपये की लागत से चलाई जा रही योजनाओं में नियम-कानून को दरकिनार कर पुराने कार्यों को नया बताकर भुगतान कराने का आरोप सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इन अनियमितताओं पर न तो किसी स्तर से प्रभावी निगरानी दिख रही है और न ही अब तक ठोस कार्रवाई।नियमानुसार किसी भी सरकारी योजना के निर्माण स्थल पर पारदर्शिता के लिए सूचना पट्ट (सूचनापट) लगाना अनिवार्य होता है, ताकि आमजन को योजना की लागत, कार्य का प्रकार और अवधि की जानकारी मिल सके। लेकिन नगर परिषद क्षेत्र में संचालित अधिकांश योजनाओं में सूचनापट का अभाव है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी खामी का फायदा उठाकर नगर परिषद कर्मी, कनीय अभियंता, संवेदक और कुछ जनप्रतिनिधि मिलकर सरकारी राशि की बंदरबांट कर रहे हैं।

वार्ड संख्या 08 बना अनियमितताओं का केंद्र

ताजा मामला नगर परिषद के वार्ड संख्या 08 का है, जहां एक ही वार्ड में तीन योजनाएं संचालित की जा रही हैं—एक निविदा के माध्यम से और दो विभागीय मद से। ग्रामीणों का कहना है कि तीनों योजनाओं में गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं।पहली योजना निविदा आधारित है, जिसका नाम डोमी यादव के घर से कैलू मुखिया के घर तक पीसीसी नाला का नया निर्माण बताया गया है। इस योजना की लागत करीब 25 लाख रुपये है। आरोप है कि इस स्थान पर नया नाला बनाने के बजाय नगर कार्यालय के पदाधिकारी, कनीय अभियंता, संवेदक और वार्ड पार्षद की कथित मिलीभगत से योजना स्थल को बदल दिया गया है। वास्तविक स्थल के विपरीत दिशा में शिवजी यादव के घर से सत्यनारायण पोद्दार के घर तक पहले से ग्राम पंचायत की सात निश्चय योजना से निर्मित पक्की नाला को तोड़कर उसे नया निर्माण दिखाया जा रहा है।

ग्रामीणों का दावा है कि इसी नाला की मरम्मत नगर परिषद द्वारा पूर्व में लगभग 5 लाख रुपये की लागत से कराई जा चुकी है। अब उसी पुराने नाले को तोड़-मरोड़ कर 25 लाख रुपये की नई योजना का रूप देकर राशि की बंदरबांट की जा रही है।

विभागीय योजनाओं पर भी सवाल

इसी वार्ड में दूसरी योजना विभागीय मद से सुदीन मुखिया के घर से बैजनाथ मुखिया के घर तक पक्की नाला निर्माण की बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पहले से ग्राम पंचायत द्वारा अच्छी स्थिति में पक्की नाला बनी हुई थी, जिसे तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। जबकि विभागीय योजनाओं में अधिकतम 15 लाख रुपये तक की ही राशि स्वीकृत होती है, इसके बावजूद खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया जा रहा है।

तीसरी विभागीय योजना कलमी नर्सिंग कॉलेज से मंगा बहियार के रास्ते पीसीसी सड़क निर्माण से जुड़ी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बहियार क्षेत्र न तो आबादी वाला है और न ही वहां एक भी आवास मौजूद है। पहले से बनी ग्राम पंचायत की सोलिंग सड़क की पुरानी ईंटों पर ही पीसीसी सड़क का निर्माण दिखाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि बिना आबादी वाले क्षेत्र में इतनी बड़ी लागत से सड़क निर्माण की प्राथमिकता आखिर क्यों दी गई।

सूचनापट नदारद, पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न

इन तीनों योजनाओं के किसी भी निर्माण स्थल पर सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम जनता को यह भी पता नहीं चल पा रहा कि योजना किस मद से, कितनी राशि में और किस उद्देश्य से संचालित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यही अपारदर्शिता भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह बन रही है।

ग्रामीणों ने की जांच की मांग

सरकारी राशि के दुरुपयोग और योजनाओं में भारी अनियमितता से आक्रोशित ग्रामीणों-सुनील बिहारी, नवल किशोर पोद्दार, जनार्दन पंडित, प्रमोद मुखिया, चंदन कुमार, मनीष कुमार सहित करीब एक दर्जन लोगों-ने कार्यपालक पदाधिकारी, जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी तथा स्थानीय विधायक संजय कुमार सिंह को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नगर परिषद क्षेत्र में विकास योजनाओं के नाम पर सरकारी धन की लूट इसी तरह जारी रहेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और जांच के नाम पर यह मामला फाइलों में दबकर रह जाता है या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है।
(क्रमशः…भाग 2 में अन्य वार्डों की तस्वीर)

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