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चिराग पासवान को विरासत में पद मिला है और विचार भी विरासत में ही मिला है।

नेता का अर्थ ही न्याय प्रिय ,सभी के हितैषी व रक्षक होता है।

अगर नेता किसी जात का होता है तो उसका उथान भी पेंडूलम के तरह होता है।

जात के नेता का हलात इधर कुईयाँ ,उधर खाई वाला हमेशा रहता है।

अनिल कुमार मिश्र, :- जन आकांक्षा का सर्वेक्षण संकेत कहता है कि लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान जात का नेता नहीं, बिहार का बेटा है और बिहार के भविष्य भी हैं, ऐसे नेताओं को जाति के बंधन से मुक्त कर समाज के लोगों इनके जज्बा को बढ़ाना चाहिए, न कि जात के नेता नहीं होने के आरोप में गालियाँ देना चाहिए।

सर्वेक्षण रिपोर्ट कहता है। विचार हमेशा उच्चा रखने से ही ब्यक्तित्व उच्चा बनता है। किसी को गाली देने से कोई जात केमुह बोले लोग महान नहीं बन जाता है। गाली देने से लोग देश का महान बन जाते तो गाली देने वाले हर लफंगे आज हमारे देश के सर्वोच्च पद पर होते और देश का सबसे महान बन जाते।

जहाँ तक किसी नेताओं को किसी जात से घिरे होने और किसी जात को अपमान की बात है। यह सर्वथा गलत है। जब नेता किसी जात का है या होता है तो परामर्श दात्ताओं को भी दूसरे जात से अपने जातियों के नेताओं को वोट नही लेने और जात से वोट लेकर ही चुनाव जीतने का परामर्श देना चाहिए।

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