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किशनगंज : रचना भवन, कंकई सभागार में CWPO के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, किशोर न्याय व पोक्सो अधिनियम पर क्षमता-वर्धन

किशनगंज,31जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई, किशनगंज के तत्वावधान में शनिवार को रचना भवन स्थित कंकई सभागार में बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाना रहा। प्रशिक्षण में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, पोक्सो अधिनियम तथा अन्य बाल संरक्षण प्रोटोकॉल के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिलाधिकारी विशाल राज, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, सिविल सर्जन, उप विकास आयुक्त (डीडीसी), सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिले के सभी थाना प्रभारी एवं बाल संरक्षण पदाधिकारी पंकज कुमार सिन्हा एवं विकास कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि बाल संरक्षण से जुड़े प्रत्येक मामले में त्वरित, समन्वित एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि थाना स्तर पर CWPO द्वारा बाल-अनुकूल वातावरण, पीड़ित की गोपनीयता तथा चिकित्सकीय, मनोसामाजिक एवं विधिक सहायता के लिए त्वरित रेफरल की व्यवस्था का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए।

पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने कहा कि पुलिस की पहली प्रतिक्रिया बालक के विश्वास और भविष्य को प्रभावित करती है। इसलिए किशोर न्याय अधिनियम एवं पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करते हुए बाल-अनुकूल पुलिसिंग को व्यवहार में लाना आवश्यक है। उन्होंने साक्ष्य-संग्रह, मेडिकल समन्वय एवं केस-डायरी के समयबद्ध संधारण पर भी बल दिया। प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों को किशोर न्याय व्यवस्था के विभिन्न घटकों, विशेष किशोर पुलिस इकाई, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड केयर संस्थान एवं जिला बाल संरक्षण इकाई की भूमिका तथा आपसी समन्वय की जानकारी दी गई। साथ ही बाल मामलों में पुलिस की निर्णायक भूमिका, गोपनीयता, सम्मानजनक व्यवहार एवं बालक के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में बाल-अनुकूल दृष्टिकोण, पीड़ित की पहचान की सुरक्षा, त्वरित सहायता एवं रेफरल, साक्ष्य प्रबंधन, समयबद्ध कार्रवाई तथा बाल कल्याण समिति सहित अन्य संस्थाओं से समन्वय जैसे बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया। यह भी रेखांकित किया गया कि बाल संरक्षण मामलों में केवल कानून की जानकारी ही नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक संवेदनशीलता भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि पीड़ित बालक को द्वितीयक आघात से बचाया जा सके। कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने बाल मामलों में विधिक सहायता एवं न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में DLSA की भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें थाना स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा बताया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के क्षमता-वर्धन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि बाल संरक्षण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

अंत में वक्ताओं ने कहा कि बालक देश का भविष्य है और उसके अधिकारों एवं सुरक्षा की रक्षा प्रशासन, पुलिस, न्यायिक तंत्र एवं समाज की साझा जिम्मेदारी है।

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