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कैंसर जागरूकता सप्ताह : बदलती जीवनशैली के बीच सतर्कता जरूरी

04 से 11 फरवरी तक जिले में विशेष अभियान, प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग एकजुट

किशनगंज,10फरवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, तेजी से बदलती जीवनशैली, असंतुलित खान–पान, बढ़ता मानसिक तनाव और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति लापरवाही आज कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को चुपचाप समाज में पैर पसारने का अवसर दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में कैंसर तब सामने आता है, जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है, जबकि समय पर जागरूकता और नियमित जांच से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।

इसी उद्देश्य को लेकर किशनगंज जिले में कैंसर जागरूकता सप्ताह (04 से 11 फरवरी) का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं कि कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि जागरूक होकर लड़ने की आवश्यकता है।

कैंसर जागरूकता सप्ताह के तहत जिलाधिकारी के कक्ष में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी विशाल राज, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, सिविल सर्जन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, प्रभारी गैर-संचारी रोग पदाधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे। इस दौरान कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और जन-जागरूकता को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

जागरूकता ही कैंसर से लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार : डीएम

जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कैंसर एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन सही समय पर जांच और जागरूकता के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते स्वास्थ्य संस्थानों से संपर्क करना चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जांच और आवश्यक जानकारी जिले के हर व्यक्ति तक पहुंचे। डीएम ने आमजन से अपील की कि वे जागरूकता सप्ताह के दौरान चल रहे कार्यक्रमों और निःशुल्क जांच सेवाओं का लाभ लें तथा अपने परिवार व आसपास के लोगों को भी जांच के लिए प्रेरित करें।

संतुलित खान–पान से कम हो सकता है कैंसर का खतरा : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे अस्वस्थ जीवनशैली और गलत खान–पान एक बड़ा कारण है। अत्यधिक तला–भुना भोजन, जंक फूड, तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाकर तथा हरी सब्जियां, फल और संतुलित आहार अपनाकर कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जागरूकता व जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

जांच में देरी बीमारी को बनाती है गंभीर

प्रभारी गैर-संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि कैंसर के अधिकांश मामलों में सबसे बड़ी समस्या जांच में देरी है। प्रारंभिक अवस्था में पहचान होने पर इलाज संभव है। इस जागरूकता सप्ताह का मुख्य उद्देश्य लोगों को समय रहते जांच के लिए प्रेरित करना है, ताकि बीमारी को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सके।

स्वस्थ भविष्य की ओर कदम

कैंसर जागरूकता सप्ताह के दौरान जिले भर में विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श और जांच गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का यह संयुक्त प्रयास समाज को यह संदेश देने का है कि कैंसर कोई अभिशाप नहीं, बल्कि सही जीवनशैली, सतर्कता और समय पर जांच से नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है।

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