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नीतीश सरकार द्वारा भूमि मापी प्रक्रिया को सरल बनाने से जमीनी विवादों पर लगेगा पूर्णविराम’’ उमेश सिंह कुशवाहा

मुकेश कुमार।बिहार जद (यू0) के मा. प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि सात निश्चय कार्यक्रम -3 के तहत ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के संकल्प को साकार करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा भूमि मापी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और सरल बनाने का निर्णय आम लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाने और उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य कदम है।

यह पहल राज्य में कई दशकों से चले आ रहे जमीनी विवादों पर पूर्णविराम लगाने में मील का पत्थर साबित होगी।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत 31 जनवरी 2026 तक भूमि मापी से संबंधित सभी लंबित आवेदनों का निपटारा विशेष अभियान के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी के लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 7 कार्यदिवस के भीतर मापी पूरी की जाएगी, जबकि विवादित जमीन की मापी के लिए मापी शुल्क जमा किए जाने के अधिकतम 11 कार्यदिवस के भीतर मापी पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

श्री कुशवाहा ने कहा कि अविवादित एवं विवादित भूमि की मापी निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण होने के उपरांत, अमीन द्वारा तैयार मापी प्रतिवेदन आवेदक के आवेदन की तिथि से 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने आगे कहा कि श्री नीतीश कुमार ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर भूमि मापी सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को आवश्यक मानव संसाधन एवं तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नीतीश सरकार की यह पहल जमीनी विवादों के स्थायी समाधान में सहायक होगी, साथ ही समाज में शांति, सौहार्द एवं विश्वास का वातावरण मजबूत होगा और बिहार विकास की पटरी पर तेजी से आगे बढ़ेगा।

 

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