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विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए भू-अर्जन की जिलावार समीक्षा

भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और न्यायालयीन मामलों के समयबद्ध निष्पादन पर जोर

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना। राज्य में संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं के भू-अर्जन कार्यों में तेजी लाने, लंबित प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से शुक्रवार को राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। भू-अर्जन निदेशक श्री कमलेश कुमार सिंह ने जिलावार विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भू-अर्जन की प्रक्रिया में तेजी लाने, लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करने तथा अनावश्यक विलंब से बचने का निर्देश दिया।

बैठक में पीएमजी के अंतर्गत आने वाली परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं और भू-अर्जन से संबंधित लंबित प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। भू-अर्जन निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समस्याओं का समाधान करें, ताकि परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अनावश्यक देरी न हो। इसके बाद रेलवे और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की विभिन्न परियोजनाओं में भू-अर्जन की प्रगति का जायजा लिया गया। संबंधित जिलों में अर्जन की वर्तमान स्थिति, लंबित कार्यों और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों की समीक्षा की गई।

उद्योग विभाग की ओर से विभिन्न जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों के लिए की जा रही भू-अर्जन संबंधी कार्रवाई पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में भू-अर्जन की प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए जिला स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि परियोजनाओं की प्रगति के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना और सामने आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान करना जरूरी है।

बैठक में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को भी प्राथमिकता दी गई। सभी जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को अपने कार्यालयों में उपलब्ध अभिलेखों की स्कैनिंग का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया। अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने से उनके व्यवस्थित संधारण, त्वरित खोज और आवश्यकता पड़ने पर आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे पुराने रिकॉर्ड के रखरखाव में सुविधा होगी और संबंधित मामलों की समीक्षा एवं कार्रवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेजों तक पहुंच आसान हो सकेगी। अधिकारियों को इस कार्य को गंभीरता से लेते हुए अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया।

भू-अर्जन से संबंधित न्यायालयीन मामलों की समीक्षा करते हुए निदेशक ने अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्देशों, निर्धारित समय-सीमा और आवश्यक प्रक्रियाओं का गंभीरता से अनुपालन किया जाना चाहिए। संबंधित मामलों में आवश्यक दस्तावेजों और अभिलेखों को समय पर तैयार रखने तथा अपेक्षित कार्रवाई में विलंब नहीं करने पर जोर दिया गया। न्यायालयीन मामलों की नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई से विभागीय कार्यों को व्यवस्थित रखने के साथ-साथ लंबित मामलों के निष्पादन में भी मदद मिलेगी।

बैठक में अपर सचिव श्री अजीव वत्सराज, विशेष कार्य पदाधिकारी श्री अनुपम प्रकाश, अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री नीरज कुमार सिंह, राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो श्री कुमार हर्ष, श्री मनोज कुमार गुप्ता, श्रीमती निशा आनंद एवं श्रीमती श्रेया मिश्रा,अवर सचिव श्री शिवजी सहित सभी जिलों के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

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