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गोपालगंज : स्याही नदी तट पर खनिज खोज को लेकर सिस्मिक सर्वे शुरू, ग्रामीणों में आशंका

गोपालगंज,20फरवरी(के.स.)। डेस्क, जिले के पंचदेवरी प्रखंड स्थित स्याही नदी के तटीय क्षेत्रों में संभावित खनिज संसाधनों की खोज को लेकर सिस्मिक सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार के निर्देश पर चल रही इस वैज्ञानिक जांच का कार्य अल्फा जियो इंडिया लिमिटेड कंपनी द्वारा किया जा रहा है। सर्वे के दौरान विभिन्न स्थानों पर ड्रिलिंग कर पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जा रहा है।कंपनी की टीम द्वारा मंगलवार को कई चिन्हित स्थानों पर ड्रिलिंग एवं नियंत्रित विस्फोट (कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन) की प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों को संग्रहित किया गया। कंपनी के पीआरओ संजीव कुमार ने बताया कि यह परियोजना भारत सरकार की पहल पर संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य जमीन के भीतर मौजूद संभावित खनिज एवं हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाना है।

उन्होंने बताया कि सिस्मिक सर्वे के लिए गंगा बेसिन ब्लॉक आवंटित किया गया है, जिसमें यह क्षेत्र भी शामिल है। पूर्व में हवाई सर्वेक्षण के माध्यम से चिन्हित प्वाइंट्स पर अब जमीनी प्रक्रिया शुरू की गई है। सर्वे के तहत पहले जमीन में लगभग 20 से 30 फुट तक ड्रिलिंग की जाती है, इसके बाद सीमित शक्ति वाले नियंत्रित विस्फोट कर कृत्रिम भूकंपीय तरंगें उत्पन्न की जाती हैं। इन तरंगों से जमीन की परतों के भीतर मौजूद चट्टानों एवं संरचनाओं का डाटा रिकॉर्ड किया जाता है।

कंपनी अधिकारियों के अनुसार यह तकनीक दशकों से तेल, गैस और खनिज की खोज में प्रयोग की जा रही है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित मानी जाती है, बशर्ते सभी मानकों का पालन किया जाए।फिलहाल टू-डी सिस्मिक सर्वे किया जा रहा है, जिसके आंकड़े जांच के लिए आंध्र प्रदेश स्थित प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। रिपोर्ट में खनिज या हाइड्रोकार्बन के संकेत मिलने पर अगले चरण में थ्री-डी सिस्मिक सर्वे कराया जाएगा।हालांकि सर्वे को लेकर लोहटी सहित आसपास के गांवों में लोगों के बीच आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के भीतर विस्फोट से भविष्य में पर्यावरण और भूमि की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। लोहटी निवासी मिथिलेश पांडेय ने बताया कि सर्वे के दौरान इडी ब्लास्ट किया जा रहा है, जिससे मिट्टी धंसने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कम प्रभाव वाले एनइडी ब्लास्ट की मांग की। वहीं राकेश पांडेय ने अपनी जमीन पर ड्रिलिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। ग्रामीण अनूप पांडेय ने कहा कि सर्वे से पहले किसानों को विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए, जबकि कंपनी द्वारा दिखाया जा रहा पत्र एक वर्ष पुराना बताया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सर्वे से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि यदि सर्वे में खनिज भंडार की पुष्टि होती है तो सरकार नियमानुसार भूमि का सीमित अवधि के लिए अधिग्रहण कर सकती है और प्रभावित किसानों को निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा।

यूपी से बिहार में प्रवेश करती है स्याही नदी

स्याही नदी उत्तर प्रदेश से निकलकर बिहार में प्रवेश करती है। गोपालगंज जिले के कुचायकोट, पंचदेवरी, कटेया और भोरे प्रखंडों के सैकड़ों गांव इसके किनारे बसे हैं। बुजुर्गों के अनुसार एक समय यह नदी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती थी, लेकिन अब अधिकांश इलाकों में इसका प्रवाह लगभग समाप्त हो चुका है। भोरे प्रखंड में इसका आंशिक प्रवाह दिखाई देता है, जबकि आगे सीवान जिले के मैरवा के पास यह झरही नदी में मिलकर दरौली के समीप सरयू नदी में समाहित हो जाती है।

हवाई सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित स्थानों पर अब नदी के गर्भ में खनिज संसाधनों की संभावनाओं की वैज्ञानिक जांच जारी है। आने वाले महीनों में लैब रिपोर्ट के बाद ही क्षेत्र में खनिज संसाधनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगा।

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