किशनगंज : आरबीएसके के माध्यम से दो बच्चों को बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया
बाल हृदय रोग पर किशनगंज का सशक्त अभियान, 34 बच्चों का सफल ऑपरेशन

किशनगंज,19फरवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, जन्म के साथ बच्चों में पाई जाने वाली गंभीर बीमारियां परिवारों के लिए बड़ी चिंता का विषय होती हैं। समय पर पहचान और उचित इलाज नहीं मिलने पर यह बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार प्रभावी पहल की जा रही है।
इसी क्रम में गुरुवार को सदर अस्पताल किशनगंज से दो बच्चों-अल्फाज हुसैन (जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित) एवं अनीशा कुमारी (कटे होंठ एवं तालु की समस्या)-को बेहतर उपचार के लिए पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) रेफर कर एम्बुलेंस से रवाना किया गया।
जिले में बाल हृदय रोग की पहचान एवं उपचार को लेकर स्वास्थ्य विभाग विशेष रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। आरबीएसके टीमों द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं समुदाय स्तर पर नियमित स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) की जा रही है, जिससे बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हो रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले के 34 बच्चों का सफल हृदय ऑपरेशन कराया जा चुका है, जो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कटे होंठ एवं तालु जैसी जन्मजात समस्याएं बच्चों के खान-पान, बोलने और सामाजिक विकास को प्रभावित करती हैं। आरबीएसके के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों में निःशुल्क सर्जरी एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे सामान्य जीवन जी सकें।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग एवं अन्य विकृतियों में समय पर जांच और उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।आरबीएसके के तहत जांच, रेफरल एवं इलाज की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आम लोगों से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ उठाने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की। प्रशासन का प्रयास है कि जिले का कोई भी बच्चा बेहतर इलाज से वंचित न रहे।
दोनों बच्चों को पटना रेफर किया जाना जिले में बाल स्वास्थ्य सेवाओं की सक्रियता और प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है। आरबीएसके के माध्यम से यह अभियान लगातार जारी है, ताकि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य मिल सके।


