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कानून-व्यवस्था पर चर्चा से भागकर सदन में हंगामा करना लोकतंत्र का अपमान – जद (यू)

मुकेश कुमार/जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अंजुम आरा एवं मीडिया पैनलिस्ट श्री किशोर कुणाल ने मीडिया में जारी बयान में आरजेडी पर तीखा हमला बोला और सदन में चर्चा की बजाए विपक्षी सदस्यों द्वारा हंगामा करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था और अपराध जैसे गंभीर विषयों को लेकर विपक्ष द्वारा जिस प्रकार का अनावश्यक हंगामा खड़ा किया जा रहा है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में हर विषय पर चर्चा का स्वागत है, लेकिन विधानमंडल जैसे गरिमामय मंच पर शोर-शराबा और राजनीतिक नारेबाजी किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराई जा सकती। यदि विपक्ष को कानून-व्यवस्था पर कोई प्रश्न उठाना है, तो उसे तथ्यों और तर्कों के साथ सदन में आकर रचनात्मक चर्चा करनी चाहिए, न कि वातावरण को भटकाने का प्रयास करना चाहिए।
विपक्षी सदस्यों द्वारा विधान परिषद के वेल में आकर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करना और इसे महिलाओं के अपमान से जोड़ना पूरी तरह से भ्रामक और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। किसी भी मुद्दे को बिना आधार महिलाओं के सम्मान से जोड़ देना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह वास्तविक महिला सशक्तिकरण के मुद्दों को भी कमजोर करता है।
बिहार की जनता भली-भांति जानती है कि तथाकथित ‘जंगलराज’ के दौर में कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति थी। वर्ष 2005 से पहले अपराध, अपहरण और भय का जो माहौल था, उसे समाप्त कर राज्य में कानून का राज स्थापित करने का कार्य मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही संभव हो सका। वर्ष 2005 के बाद अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ, न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना विकसित हुई। यदि विपक्ष को सचमुच कानून-व्यवस्था पर चर्चा करनी है, तो उसे सदन में आकर तथ्यों के आधार पर बहस करनी चाहिए। हंगामा करना और हर मुद्दे को महिला अपमान से जोड़ देना केवल राजनीतिक सहानुभूति प्राप्त करने का प्रयास है, जिसे जनता भली-भांति समझती है।
जहां तक महिलाओं के सम्मान और अधिकारों का प्रश्न है, तो बिहार में महिलाओं को वास्तविक सशक्तिकरण देने का काम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने किया है। पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने वाली योजनाएं और महिला सुरक्षा से जुडे़ ठोस कदम – ये सभी निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि महिलाओं का सम्मान और अधिकार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए केवल नारा नहीं, बल्कि नीति और प्रतिबद्धता है।

कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर राजनीति नहीं, बल्कि नीति और नीयत से काम होना चाहिए। सदन की गरिमा बनाए रखना और तथ्यात्मक बहस करना ही लोकतंत्र की सच्ची भावना है। विपक्ष को भी इसी परंपरा का पालन करना चाहिए।

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