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किशनगंज : गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान को निर्णायक मजबूती

डीएम की अध्यक्षता में स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा, कमजोर प्रखंडों पर सख्त रुख

किशनगंज,10फरवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और सुरक्षित मातृत्व को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से किशनगंज जिला प्रशासन ने गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान को निर्णायक मजबूती देने का निर्णय लिया है। मंगलवार को जिलाधिकारी विशाल राज की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब स्वास्थ्य योजनाओं में केवल औपचारिक गतिविधियां नहीं, बल्कि ठोस और मापनीय परिणाम अपेक्षित हैं।जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी पंचायत में गृह प्रसव की घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जाएगा और इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

संस्थागत प्रसव में पिछड़ रहे प्रखंडों पर सख्ती

समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि पोठिया और टेढ़ागाछ प्रखंडों में संस्थागत प्रसव की प्रगति अपेक्षित स्तर से नीचे है। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर पहचान, नियमित एएनसी जांच और प्रसव पूर्व माइक्रो प्लानिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि गृह प्रसव न केवल स्वास्थ्य जोखिम है, बल्कि प्रशासनिक विफलता भी है।

आयुष्मान व एएनसी सेवाओं की स्थिति पर चिंता

बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना में टेढ़ागाछ और दिघलबैंक प्रखंडों का प्रदर्शन सबसे कमजोर है। वहीं एएनसी सेवाओं में दिघलबैंक और ठाकुरगंज की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। डीएम ने निर्देश दिया कि सभी पात्र परिवारों का आयुष्मान कार्ड प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाए और गर्भवती महिलाओं की चारों अनिवार्य एएनसी जांच शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जाए।

एनीमिया मुक्त मातृत्व पर विशेष जोर

आईएफए एवं कैल्शियम टैबलेट वितरण में ठाकुरगंज प्रखंड की कमजोर स्थिति पर डीएम ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एनीमिया मुक्त मातृत्व सुरक्षित प्रसव की बुनियाद है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही मातृ स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है।

परिवार नियोजन व एम-आशा में तय होगी जवाबदेही

परिवार नियोजन कार्यक्रम में लक्ष्य के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले प्रखंडों में एमओआईसी, बीसीएम और बीएचएम को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। वहीं एम-आशा कार्यक्रम में टेढ़ागाछ प्रखंड के बीसीएम को शो-कॉज करने का आदेश दिया गया। डीएम ने निर्देश दिया कि एम-आशा से जुड़ी सभी प्रविष्टियां तीन दिनों के भीतर पूर्ण कर अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, अन्यथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

टीकाकरण में जिले की बड़ी उपलब्धि

समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि पूर्ण टीकाकरण में किशनगंज जिला पूरे बिहार में दूसरे स्थान पर है। जिलाधिकारी ने इसे आशा, एएनएम और स्वास्थ्यकर्मियों की सतत मेहनत का परिणाम बताते हुए सराहना की और अन्य योजनाओं में भी इसी तरह के प्रदर्शन की अपेक्षा जताई।

योजनाएं नहीं, जीवन बचाना लक्ष्य है

बैठक को संबोधित करते हुए डीएम विशाल राज ने कहा, “गृह प्रसव मुक्त पंचायत अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि माताओं और नवजातों के जीवन से जुड़ा अभियान है। जहां सुधार की जरूरत है, वहां तत्काल बदलाव दिखना चाहिए। टीकाकरण में मिली सफलता यह प्रमाण है कि इच्छाशक्ति हो तो परिणाम संभव हैं।”

सख्ती के साथ सहयोग का संतुलन

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ फील्ड स्तर पर सहयोग भी सुनिश्चित कर रहा है। आशा, एएनएम और पंचायत प्रतिनिधियों के समन्वय से गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी, समय पर रेफरल, एंबुलेंस सुविधा और सुरक्षित संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है-जिले की हर पंचायत को गृह प्रसव मुक्त बनाना और सुरक्षित मातृत्व को एक स्थायी सामाजिक व्यवहार के रूप में स्थापित करना।यह समीक्षा बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि किशनगंज जिला प्रशासन अब स्वास्थ्य योजनाओं में लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि हर मां और हर नवजात सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सके।

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