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सतत एवं लाभकारी कृषि विकास को लेकर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में अहम बैठक

फसल विविधीकरण और उच्च मूल्य वाली खेती पर सरकार का विशेष फोकस
किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एम-एस.एच.ओ.पी. मॉडल पर मंथन

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/पटना। आज पुराना सचिवालय स्थित सभा कक्ष में किसानों के लिए प्रैक्टिकल एवं प्रोफिटेबल दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए कृषि क्षेत्र के सतत विकास पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता विकास आयुक्त, बिहार श्री मिहिर कुमार सिंह ने की। बैठक में कृषि को अधिक लाभकारी, विविधीकृत एवं बाजारोन्मुख बनाने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
विकास आयुक्त महोदय ने बैठक में एम-एस.एच.ओ.पी. (M-SHOP) की अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस मॉडल में M–Marketing, S–Spices, H–Horticulture, O–Oil Crops एवं P–Pulses को आधार बनाकर कृषि क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि मौसम के अनुकूल, जिलावार एवं क्षेत्रवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए फसल पद्धतियों का चयन किया जाए तथा फसल विविधीकरण को प्राथमिकता दी जाए।
विकास आयुक्त ने कहा कि जिन कृषि उत्पादों का वर्तमान में आयात किया जा रहा है, उनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। इसी क्रम में दलहन एवं तेलहन के क्षेत्र विस्तार और उत्पादन बढ़ाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
उन्होंने टमाटर उत्पादन को बढ़ावा देने, बिहार में ग्रीन एप्पल की खेती को प्रोत्साहित करने तथा बादाम (Almond) और ब्लूबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती की शुरुआत करने के निर्देश दिए। धान के क्षेत्र में बासमती के साथ-साथ हाइब्रिड धान की खेती को बढ़ावा देने, अरहर एवं मटर की खेती के विस्तार तथा बेगूसराय जिले में लक्ष्य निर्धारित कर सोयाबीन की खेती को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष बल दिया गया।
इसके अतिरिक्त ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, शहजन, हरा चना जैसी फसलों को बढ़ावा देने की बात कही गई। पटना एवं आसपास के जिलों में हरा चना उत्पादन हेतु विशेष लक्ष्य निर्धारण करने के निर्देश दिए गए। मालटा एवं किनो की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु कार्य योजना बनाने का निदेश दिया गया।
विकास आयुक्त ने कहा कि कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मल्टी मॉडल हब विकसित किया जाना आवश्यक है। साथ ही दलहन क्षेत्र के विस्तार के लिए नई किस्मों के प्रयोग, मूल्य संवर्धन एवं समेकित योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए। बीज क्षेत्र में सरकारी संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर किसानों के हित में कार्य करने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने निदेश दिया कि जमुई मे चिया सीड की खेती, खगड़िया में सूर्यमुखी की खेती तथा गयाजी में कुसुम की खेती को बढ़ावा दी जाये। विकास आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि कोई भी नीति तभी सफल होगी, जब उसे किसान अपनाएंगे, इसलिए योजनाओं को किसानों की जरूरतों और व्यवहारिकता के अनुरूप बनाया जाए।
बैठक में प्रधान सचिव, कृषि विभाग श्री नर्मदेश्वर लाल, सचिव, सूचना प्रावैधिकी विभाग श्री अभय कुमार सिंह, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पुण्यव्रत सुविमलेंदु पांडे, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह, कृषि निदेशक श्री सौरभ सुमन यादव, उद्यान निदेशक श्री अभिषेक कुमार, कृषि वैज्ञानिकों सहित विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारीगण भी उपस्थित थे।

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