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ठंड में नवजात की पहली ढाल है मां का दूध

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान से संक्रमण, हाइपोथर्मिया व श्वसन रोगों से सुरक्षा

किशनगंज,31जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, सर्द मौसम नवजात शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बनकर सामने आता है। जन्म के तुरंत बाद तापमान में गिरावट, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और वातावरण में मौजूद संक्रमण नवजात के जीवन पर संकट पैदा कर देते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में नवजात को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपाय जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की शुरुआत है। मां का पहला दूध न केवल संपूर्ण पोषण देता है, बल्कि शिशु को ठंड और संक्रमण से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है।

महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि जन्म के बाद का पहला घंटा नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान शिशु का शरीर अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है। यदि इसी समय मां से त्वचा का संपर्क और स्तनपान कराया जाए, तो शिशु को प्राकृतिक ऊष्मा मिलती है। ‘स्किन टू स्किन केयर’ के साथ स्तनपान नवजात को ठंड और संक्रमण से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्म के बाद निकलने वाला गाढ़ा पीला दूध, जिसे क्लोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात के लिए किसी जीवनरक्षक दवा से कम नहीं है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी ठंड के मौसम में होने वाले डायरिया, निमोनिया और श्वसन संक्रमण से शिशु की रक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि क्लोस्ट्रम को फेंकना बच्चों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है, जबकि ठंड के मौसम में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी के दिनों में नवजात को अतिरिक्त पानी या अन्य तरल देना खतरनाक हो सकता है। छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के लिए पर्याप्त होता है। मां का दूध शिशु के शरीर में ताप संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ उसकी कमजोर प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूती देता है।

डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि सिजेरियन प्रसव के बाद ठंड और कमजोरी के कारण कई बार स्तनपान में देरी हो जाती है, जो नवजात के लिए जोखिमपूर्ण है। चिकित्सकीय मानकों के अनुसार ऑपरेशन के बाद भी एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाना चाहिए, ताकि शिशु को ठंड से सुरक्षा मिल सके। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019–20) के अनुसार, किशनगंज जिले में केवल 47.4 प्रतिशत नवजात ही जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कर पाते हैं। ठंड के मौसम में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, समय पर स्तनपान से संक्रमण जनित शिशु मृत्यु में 88 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने कहा कि ठंड के मौसम में नवजातों की सुरक्षा के लिए स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने आशा, एएनएम, सीएचओ और स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि प्रसव के तुरंत बाद मां और शिशु को अलग न किया जाए और समय पर स्तनपान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ठंड में मां का दूध ही नवजात की सबसे मजबूत ढाल है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान ठंड, संक्रमण और नवजात मृत्यु के खिलाफ पहला और सबसे प्रभावी जीवनरक्षक कदम है।

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