किशनगंज : कुपोषण उन्मूलन की दिशा में निर्णायक पहल
पोषण पुनर्वास केंद्रों की भूमिका और सुदृढ़, अब मध्यम कुपोषित बच्चों को भी मिलेगा उपचार, एक वर्ष में 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल इलाज

किशनगंज,13जनवरी(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, बचपन को कुपोषण से सुरक्षित रखना किसी भी समाज के स्वस्थ भविष्य की मजबूत बुनियाद होता है। इसी लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए किशनगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों को नई गति दी गई है। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के नवीन निर्देशों के आलोक में अब पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की सेवाओं का दायरा बढ़ा दिया गया है, जिससे कुपोषण से ग्रसित बच्चों को समय पर समुचित उपचार और पोषण संबंधी सहयोग मिल सके।
अब चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित बच्चों की भी होगी भर्ती
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अब तक एनआरसी में केवल गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों को ही भर्ती किया जाता था। लेकिन नए निर्देशों के तहत अब ऐसे मध्यम तीव्र कुपोषित (एमएएम) बच्चों, जिनमें एनीमिया, रिकेट्स, विटामिन की कमी या अन्य चिकित्सीय जटिलताएं पाई जाती हैं, को भी एनआरसी में भर्ती कर उपचार दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उपचार नहीं मिलने पर ऐसे बच्चे गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पहुंच सकते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–5 (2019–21) का हवाला देते हुए बताया कि बिहार में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दुर्बलता (वेस्टिंग) की दर 22.9 प्रतिशत तथा गंभीर दुर्बलता की दर 8.8 प्रतिशत है। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि मध्यम कुपोषित बच्चों की समय रहते पहचान और उपचार बेहद आवश्यक है।
एक वर्ष में 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार
नोडल पोषण पुनर्वास केंद्र के प्रभारी विश्वजीत कुमार ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच किशनगंज जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों में कुल 118 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर सफल उपचार किया गया। इन बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी के साथ संतुलित पोषण आहार उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके वजन, पोषण स्तर और समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
गंभीर अवस्था से पहले ही बच्चों को बचाना होगा संभव
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह नीतिगत बदलाव जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष में 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार यह साबित करता है कि समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की जान और भविष्य दोनों सुरक्षित किए जा सकते हैं। अब चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित बच्चों को भी एनआरसी से जोड़कर उन्हें गंभीर अवस्था में पहुंचने से पहले ही सुरक्षित किया जा सकेगा।
पहचान से पुनर्वास तक व्यवस्था होगी और प्रभावी
नोडल पदाधिकारी विश्वजीत कुमार ने बताया कि नए निर्देशों के बाद एनआरसी की जिम्मेदारी और अधिक व्यापक हो गई है। अब भर्ती बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, वजन वृद्धि, आवश्यक आहार उपलब्धता और संक्रमण की दर में कमी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आंगनवाड़ी सेविका, आशा बहू और एएनएम के माध्यम से चिकित्सीय जटिलता वाले एमएएम बच्चों की पहचान कर उन्हें शीघ्र एनआरसी तक पहुंचाया जाएगा।
कुपोषण उन्मूलन सामूहिक प्रयास से ही संभव
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य विभाग की चुनौती नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। नए निर्णय से अब अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिल सकेगा और इसकी नियमित समीक्षा कर व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पोषण पुनर्वास केंद्रों की जानकारी ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों और समुदाय स्तर पर चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और त्वरित रेफरल को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह पहल सतत विकास लक्ष्य–2 “भूख मिटाओ, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण सुनिश्चित करो” की दिशा में किशनगंज जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की ओर एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम मानी जा रही है।



