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किशनगंज का मोतीबाग बना ‘गैस चैंबर’

नगर परिषद की लापरवाही से दमा, खांसी और मौत का खतरा बढ़ा; मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज

किशनगंज,26नवंबर(के.स.)। धर्मेन्द्र सिंह, कहते हैं—“सांसें छीनने का अधिकार सिर्फ यमराज को है।” लेकिन किशनगंज नगर परिषद के मोतीबाग मोहल्ले की वास्तविकता इससे अलग और भयावह है। पूरे शहर का कचरा, अस्पताल का मेडिकल वेस्ट, मरे जानवर और दुर्गंधयुक्त कूड़ा वर्षों से यहां खुले में डंप किया जा रहा है। आग लगने पर उठने वाला घना जहरीला धुआं पूरे मोहल्ले को गैस चैंबर में तब्दील कर देता है।

लगभग 5000 आबादी वाले मोतीबाग (वार्ड संख्या 7) के निवासी दिन-रात धुएं, कचरे और जहरीली गैसों के बीच जीवन बिताने को विवश हैं। बच्चों और बुजुर्गों में सांस, दमा, खांसी और एलर्जी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई परिवार तो बच्चों की सुरक्षा के लिए मोहल्ला छोड़कर जा चुके हैं।

स्थानीयों की पीड़ा : खिड़कियां बंद, सांसें बंद, ज़िंदगी बंद

मोहल्ले के लोग बताते हैं कि कचरे के ढेर में नियमित रूप से आग लगी रहती है। “तीन किलोमीटर तक धुआँ फैल जाता है। बच्चों को घर के अंदर बंद रखना पड़ता है, फिर भी सांस लेने में परेशानी होती है,” एक पीड़ित महिला ने बताया।

वार्डवासी छोटू कहते हैं—“मक्खी-मच्छर इतने हैं कि सांस लेते वक्त नाक में घुस जाते हैं। शिकायत करने पर अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। कई बार तो विरोध करने पर नगर परिषद ने हम लोगों पर ही मुकदमा कर दिया।”

बीमारियां बढ़ने के कारण कई लोग हर दूसरे दिन अस्पतालों और निजी चिकित्सकों की चौखट पर दिखते हैं। उल्टी, बुखार, एलर्जी, दमा और सांस की तकलीफ अब आम बात हो चुकी है।

वर्षों से शिकायतें, पर प्रशासन उदासीन

मोतीबाग के निवासियों ने कई बार नगर परिषद, डीएम किशनगंज, जिला लोक शिकायत, अनुमंडल लोक शिकायत तथा प्रमंडल आयुक्त पूर्णिया को आवेदन दिया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। नगर परिषद द्वारा पूरे शहर का कचरा इसी सड़क किनारे वाले भूभाग पर डंप किया जाता है, जो किसी भी पर्यावरणीय मानक पर खरा नहीं उतरता।

मानवाधिकार आयोग में दायर हुई बड़ी शिकायत

नगर परिषद की लगातार उपेक्षा से क्षुब्ध होकर
राष्ट्रीय आरटीआई कार्यकर्ता एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अनसार खां ने
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में औपचारिक शिकायत दर्ज की है।

उन्होंने आयोग से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • डीएम, नगर परिषद व बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) की मांग।
  • मोतीबाग में खुले में डंपिंग व कचरा जलाने पर तत्काल प्रतिबंध।
  • वैज्ञानिक पद्धति से कचरा निस्तारण के लिए वैकल्पिक स्थल व स्थायी प्रबंधन प्रणाली की स्थापना।
  • प्रभावित नागरिकों के लिए स्वास्थ्य शिविर, मेडिकल परीक्षण और उपचार की व्यवस्था।
  • पर्यावरण व स्वास्थ्य कानूनों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर दंडात्मक/अनुशासनात्मक कार्रवाई।

क्या मोतीबाग को मिलेगा राहत?

मोतीबाग की त्रासदी सिर्फ कचरे की समस्या नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य, मानवाधिकार और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
स्थानीय लोग साफ कहते हैं—“अगर किसी की मौत जहरीली गैस से होती है, तो इसके लिए नगर परिषद के अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।

अब निगाहें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या प्रशासन को जगाने के लिए मोतीबाग को और कितनी सांसें गंवानी होंगी?

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