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एएसपी व डीडीसी ने किया जांच शुरू,कुछ सामानों को छेड़छाड़ न करने का निर्देश…क्या मनु प्रसाद का प्रोन्नति रद्द कर दी जायेगी…?

पोठिया थाना उपद्रव मामले की जांच को लेकर एएसपी अनिल कुमार व डीडीसी रामजी साह मंगलवार को थाना पहुंचे।थाना के सभी अधिकारियों, सशस्त्र बलों व जवानों से घटना के बात अलग-अलग जानकारी ली तथा पूरे थाना परिसर का मुआयना किया।साक्ष्य के रुप में कुछ सामानों को यथावत रखने,छेड़छाड़ न करने का निर्देश देते हुए घटना के हर पहलु से अवगत हुए।घटना के चौथे दिन मंगलवार को यह नजारा थाना के आंदर का था,जहां एएसपी व डीडीसी वर्दीधारियों के बचाव को कलमबंद कर रही थी।घटना का थानाध्यक्ष मनु प्रसाद के बाद रहे दूसरे खलनायक चौकीदार लीलचंद राय के विरुद्ध पोठिया थाना कांड संख्या 31 /17 भादवि की धारा 341, 323 के तहत राजू हांसदा के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।प्राथमिकी में राजू हांसदा ने पोठिया अस्पताल से भागने का प्रयास करने की बात स्वीकारते हुए पकड़े जाने के बाद मारने का आरोप लगाया है।घटना क्रम के तहत गुरुवार 11 फरवरी को जब शराब के नशे में चौकीदार दिलीप हरिजन व उसके साथी राजू हांसदा को एक साथ पकड़ कर थाना लाया गया तो इसके बाद थानाध्यक्ष मनु प्रसाद ने दोनों को मेडिकल जांच हेतु पोठिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा।दोनों को साथ लाने ले जाने का जिम्मा चौकीदार लीलचंद राय व जय नारायण राय को सौंपा गया।तभी अस्पताल से राजू हांसदा घर की ओर भाग निकलना चाह रहे थे।जिस क्रम में येन-केन-प्रकरेण उन्हें चोट लग गई।जिसे शुरुआती दौर से मारपीट होना बताया जा रहा था।जिसकी अब प्राथमिकी के बाद पुष्टि हुई है।प्राथमिकी में राजू हांसदा ने सिर्फ चौकीदार लीलचंद पर मारपीट का आरोप लगाया है।सम्प्रति चार दिन इलाजरत करने के पश्चात सोमवार को नार्थ बंगाल मेडिकल कालेज से डिस्चार्ज को पश्चात राजू हांसदा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।घटना को लेकर सवाल ही सवाल शनिवार को पोठिया में आगजनी व तोड़फोड़ की घटना को लेकर आमजनों के जेहन में अब भी कई सवाल कौंध रहा है,तो पुलिस प्रशासन भी इस गुत्थी को सुलझाने में जुट गई है।नेताओं,जनप्रतिनिधियों के द्वारा लगातार इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।शासंतिप्रय इलाका के रुप में चर्चित इस क्षेत्र में एकाएक इस तरह की घटना से लोग हतप्रभ है।जो कुछ शनिवार 11 फरवरी को हुआ वह पोठिया के लिए काला अध्याय के रुप में जुड़े गया।एक सामान्य सवाल जो आमजन से लेकर खासजन तक चल रही है,वह यह कि राजू हांसदा के मरने की अफवाह कैसे फैली ? क्या यह महज सामान्य बात थी या फिर कुछ और ? निश्चित रुप से थानाध्यक्ष की चूक सभी मान रहे हैं,लेकिन यह सवाल भी एक दूसरे से पूछ रहे है।मालुम हो की किशनगंज के तीन दारोगा समेत कोसी के एक दर्जन दारोगा को इंस्पेक्टर पद में मिली है।

किशनगंज के जिन तीन दारोगा को मिली है उनमें पोठिया थाना के निलंबित व नव पदस्थापित थानाध्यक्ष भी शामिल हैं। शनिवार को आदिवासियों द्वारा पोठिया थाना जलाने को लेकर निलंबित किए गए मनु प्रसाद व निलंबन के बाद नव पदस्थापित विजय कुमार, दोनों को एक साथ मिला है। इसके अलावा टाउन थाना में पदस्थापित दीपांकर श्रीज्ञान को दी गई है। राज्य पुलिस मुख्यालय के द्वारी जारी पत्र के अनुसार बिहार के 96 दारोगा को प्रोन्नत किया गया है, ये सभी दारोगा 94 बैच के हैं। जिन 96 दारोगा को प्रोन्नत किया गया है उनमें पूर्णिया व सहरसा रेंज के 11 व कटिहार रेल के एक दारोगा शामिल हैं। इसके अलावा दरभंगा के तीन दारोगा को के साथ ही सहरसा व मधेपुरा स्थानांतरण किया गया है। दरअसल 27 जून 2016 की बोर्ड की बैठक में पुलिस अवर निरीक्षक से पुलिस निरीक्षक पद पर को लेकर सहमति बनी थी। 1 बोर्ड की बैठक में योग्य पाए गए पुलिस अवर निरीक्षकों को योगदान की तिथि से पुलिस निरीक्षक पद पर औपबंधि रूप से का निर्देश जारी किया गया है।

पोठिया थाना के निलंबित थानाध्यक्ष मनु प्रसाद को भले ही प्रोन्नति मिल गई हो लेकिन उनके लिए डगर बड़ी कठिन है।एसपी राजीव मिश्र के अनुसार मनु प्रसाद के खिलाफ दो-दो विभागीय कार्रवाई पूर्व से ही लंबित है,इसलिए उन्हें प्रोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।ऐसे में एडीजी मुख्यालय के पत्र में लगाए गए शर्त के अनुसार एसपी के रिपोर्ट पर मनु प्रसाद को प्रोन्नति मिलना मुमकिन नहीं दिखता।दरअसल राज्य पुलिस मुख्यालय ने जिन 96 नामों पर प्रोन्नति की मुहर लगाई है,उन नामों पर 27 जून की बोर्ड की बैठक में ही सहमति बन चुकी थी।हालांकि मंगलवार को जारी पत्र में अपर पुलिस महानिदेशक,मुख्यालय ने साफ किया है कि नव प्रोन्नत पुलिस निरीक्षक के विरुद्ध यदि कोई विभागीय कार्यवाही लंबित हों,निलंबन हो अथवा सजा के प्रभाव में हो या उनके विरुद्ध फौजदारी,आपराधिक मामला लंबित हो तो प्रोन्नति रद्द कर दी जाएगी।

रिपोर्ट-धर्मेन्द्र सिंह 

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