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तो क्या मोदी और नीतीश की यह करीबी लालू को नीतीश से दूर कर देगी ? नीतीश कुमार एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं।अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान रेलमंत्री की जिम्मेदारी भी नीतीश कुमार संभाल चुके हैं।ऐसे में अगर लालू प्रसाद यादव ने महागठबंधन से अलग होकर नीतीश की सरकार गिराने की कोशिश की तो क्या उन्हें भाजपा का साथ मिलेगा ? ऐसे कई सवाल हैं,जो हवा में तैरने लगे हैं।सियासी चर्चाओं के अनुसार बिहार विधानसभा की मौजूदा स्थिति के मुताबिक राजद 80 सीटों के साथ सूबे की सबसे बड़ी पार्टी है।स्थिति यह है कि अगर नीतीश-लालू अलग होते हैं,तो नीतीश कुमार 71 सीटें और भाजपा की 53 सीटें मिलाकर बहुमत का आंकड़ा 122 पार हो जाएगा।दूसरी ओर लालू और कांग्रेस दूसरे दलों को मिलाकर भी बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे।नीतीश और मोदी की करीबी नोटबंदी के मुद्दे पर भी दिखी थी।

उनके अनुसार जो सही है वो तो कहना ही पडे़गा।लालू के साथ मजबूरी यह है कि अगर वे नीतीश के विरोध में जाते हैं तो उन्हें हासिल कुछ नहीं होगा।दूसरी तरफ अगर नीतीश की भाजपा से नजदीकी बढ़ी तो राजद एक बार फिर लंबे समय के लिए सत्ता से दूर हो जाएगा।Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur.