*सामाजिक एकता, समरसता एवं राजनीतिक सम्मान का आधार है संगठित समाज:_डॉक्टर प्रेम कुमार*
त्रिलोकी नाथ प्रसाद/बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार अखिल सिंदुरिया बनिया, कैथ बनिया एवं कैथल वैश्य महासभा के स्थापना दिवस समारोह सह राष्ट्रीय महासम्मेलन में शामिल हुए।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वैश्य समाज भारतीय संस्कृति, व्यापार, अर्थव्यवस्था और समाज सेवा की एक महत्वपूर्ण शक्ति रहा है। वैश्य समाज के लिए व्यापार केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि समाज निर्माण, रोजगार सृजन और राष्ट्र की आर्थिक उन्नति का आधार रहा है। देश के विकास में वैश्य समाज का योगदान सदियों से महत्वपूर्ण रहा है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी सामाजिक शक्ति को और अधिक संगठित करें। समाज की प्रगति केवल आर्थिक समृद्धि से नहीं होती, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और संगठनात्मक एकता से होती है। जब समाज संगठित होता है तो उसकी आवाज भी प्रभावी होती है और उसका सम्मान भी बढ़ता है। सामाजिक समरसता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। हमारा देश विविधताओं का देश है, जहाँ अनेक जातियाँ, भाषाएँ, परंपराएँ और संस्कृतियाँ मिलकर भारत की महान सभ्यता का निर्माण करती हैं। इसलिए हमें ऐसा समाज बनाना है जहाँ सभी वर्गों के बीच प्रेम, सहयोग और सम्मान का वातावरण हो। सामाजिक समरसता ही राष्ट्र को मजबूत बनाती है और विकास की गति को तेज करती है।
लोकतंत्र में प्रत्येक समाज की भागीदारी आवश्यक है। समाज जितना शिक्षित, जागरूक और संगठित होगा, उसकी राजनीतिक भागीदारी उतनी ही प्रभावशाली होगी। राजनीतिक सम्मान किसी के द्वारा प्रदान की जाने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि यह समाज की एकता, जागरूकता और सकारात्मक योगदान से प्राप्त होता है। मैं विशेष रूप से युवाओं से कहना चाहता हूँ कि वे शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं। वर्तमान समय ज्ञान, तकनीक और नवाचार का युग है। जो समाज शिक्षा और तकनीकी दक्षता में आगे होगा, वही आने वाले समय का नेतृत्व करेगा। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रशासनिक सेवाओं, उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए। महासभा को भी युवाओं के मार्गदर्शन और कौशल विकास के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने चाहिए।
महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी समाज का विकास संभव नहीं है। हमारी मातृशक्ति परिवार और समाज की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। हमें महिलाओं की शिक्षा, स्वावलंबन और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना होगा। जिस समाज में महिलाओं को सम्मान और अवसर मिलता है, वह समाज तेजी से प्रगति करता है।
आज भारत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, जनधन योजना और अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रमों ने समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है। वैश्य समाज की उद्यमशीलता इन योजनाओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हमें समाज में सेवा की भावना को भी मजबूत करना होगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्धन परिवारों की सहायता, छात्रवृत्ति, सामूहिक विवाह, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए। सेवा ही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है।
उन्होंने आह्वान किया कि सभी सामाजिक एकता, समरसता, शिक्षा, संगठन और राष्ट्रहित के लिए मिलकर कार्य करें। अपने समाज को नई पीढ़ी के अनुरूप सक्षम, शिक्षित और संगठित बनाएं। जब समाज संगठित होगा, तब उसका सामाजिक और राजनीतिक सम्मान स्वतः बढ़ेगा।


