भारतीय नृत्य कला मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम “शुक्रगुज़ार” का सफल आयोजन।

त्रिलोकी नाथ प्रसाद/कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार के अंतर्गत भारतीय नृत्य कला मंदिर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम “शुक्रगुज़ार” का आयोजन शुक्रवार को बहुद्देशीय सांस्कृतिक परिसर स्थित कन्सर्ट हॉल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में लोकनृत्य एवं शास्त्रीय संगीत की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा सभागार देर शाम तक सांस्कृतिक रंगों में सराबोर रहा।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्रशासी पदाधिकारी श्रीमती अमृता प्रीतम द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। उद्घाटन के उपरांत कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं भारतीय शास्त्रीय संगीत परंपरा की अनुपम छटा प्रस्तुत की।
सांध्य की पहली प्रस्तुति प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक श्री राकेश कुमार राय द्वारा दी गई। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत बंदिश “ऐ गोकुल गांव के छोरा, बनारस के नार” से की। इसके उपरांत “सुंदर सूरजनवा साईं रे” सहित ख्याल, ठुमरी एवं ग़ज़ल की मधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी सुरमयी गायकी ने पूरे सभागार को संगीतमय वातावरण से भर दिया और उपस्थित संगीतप्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति अम्ब्रपाली पुरस्कार (नवोदित) से सम्मानित लोक कलाकार सुदामा पाण्डेय की रही। उन्होंने बिहार की पारंपरिक लोकनृत्य शैलियों एवं पौराणिक नृत्य परंपराओं को अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं जीवंत ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति में गुड़िया नाच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें विद्यापति की रचना “आजुनाथ एक व्रत” की मनोहारी प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इसके उपरांत पद्म विभूषण शारदा सिन्हा द्वारा गाए प्रसिद्ध कजरी गीत “अरे रामा भादो पर मोर नृत्य” पर आधारित प्रस्तुति को भी दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम में उपस्थित कला प्रेमियों, सुधी दर्शकों एवं श्रोताओं ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस अवसर पर भारतीय नृत्य कला मंदिर के शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। मंच संचालन श्रीमती सोमा चक्रवर्ती द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया।
भारतीय नृत्य कला मंदिर द्वारा समय-समय पर आयोजित ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रदेश की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


