“उद्योगों के साथ सहभागिता सम्मेलन 2026” में तैयार हुआ बिहार को स्किल हब बनाने का विजन* *युवाओं को कुशल एवं सक्षम बनाकर उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करने को संकल्पित है सरकार : माननीय मंत्री, अरुण शंकर प्रसाद*
*पीएम-सेतु और मेगा स्किल सेंटर से जोड़कर कर युवाओं को रोजगारन्मुख बनाना है हमारा लक्ष्य : सचिव, डॉ कौशल किशोर*
त्रिलोकी नाथ प्रसाद: आधुनिक बाज़ार मांग के अनुरूप उद्योग समूहों के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के अंतर्गत संचालित बिहार कौशल विकास मिशन के द्वारा आयोजित “उद्योगों के साथ सहभागिता सम्मेलन 2026” विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर विभाग के माननीय मंत्री, श्री अरुण शंकर प्रसाद और सचिव, डॉ. कौशल किशोर ने संयुक्त रूप से किया। उक्त अवसर पर निदेशालय नियोजन के निदेशक, श्री सुनील कुमार, बिहार कौशल विकास मिशन के ए सी ई ओ, श्री हेमंत कुमार सिंह, मिशन निदेशक, श्री मनीष शंकर के साथ देश के प्रतिष्ठित उद्योग समूहों के प्रतिनिधिगण मौजूद रहे। इससे पूर्व सम्मानित अतिथियों का स्वागत और अभिनन्दन अंगवस्त्र एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया।
उक्त अवसर पर माननीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का यह सम्मेलन बिहार के भविष्य को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। “निवेश, प्रशिक्षण एवं रूपांतरण” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार युवाओं को उद्योगों की मांग के अनुरूप कुशल एवं सक्षम बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रत्येक कौशल को रोजगार से जोड़ना है, ताकि युवाओं को सम्मानजनक अवसर मिल सके।बिहार सरकार कौशल विकास को आर्थिक प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम मानती है। उन्होंने कहा कि यदि कौशल को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाए, तो राज्य के लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुल सकते हैं। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री सेतु योजना को राज्य में प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह योजना उद्योगों और युवाओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगी तथा प्रशिक्षण और रोजगार के बीच सीधा संबंध स्थापित करेगी। सरकार का लक्ष्य बिहार के आई.टी.आई संस्थानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विश्वस्तरीय कौशल संस्थानों के रूप में विकसित करना है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से बिहार के 75 आई.टी.आई संस्थानों को आधुनिक एवं उद्योगोन्मुख बनाया जाएगा। राज्य में 15 क्लस्टरों के माध्यम से आई.टी.आई संस्थानों के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई गई है, जिसके लिए कुल ₹3615 करोड़ की लागत प्रस्तावित है। इसमें लगभग ₹615 करोड़ का निवेश उद्योगों द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
मंत्री ने मेगा स्किल सेंटर योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के 9 प्रमंडलों में अत्याधुनिक कौशल केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को मांग आधारित प्रशिक्षण, विदेशी रोजगार अवसरों की तैयारी तथा उद्यमिता विकास से जोड़ा जाएगा। उन्होंने उद्योग जगत से अपील करते हुए कहा कि उद्योग केवल सहभागी नहीं, बल्कि सरकार के साझेदार बनें। जब सरकार और उद्योग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तभी कौशल विकास एक योजना नहीं, बल्कि जनआंदोलन का रूप लेता है। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार का संकल्प स्पष्ट है — “हर युवा को कौशल, हर कौशल को अवसर और हर अवसर को सम्मानजनक रोजगार।” उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, उद्योग जगत और युवाओं के सामूहिक प्रयास से बिहार को कौशल विकास, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।
वहीं, श्री कौशल किशोर, सचिव, युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने अपने स्वागत संबोधन में सम्मेलन की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में उद्योग एवं सरकार की सहभागिता को सफलता का आधार बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य पी एम सेतु योजना को राज्य 75 औद्योगिक संस्थानों में स्थापित करना और मेगास्किल सेंटर के माध्यम से राज्य के युवाओं को जोड़कर कर रोजगारन्मुख बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि कौशल विकास तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु उद्योगों की सक्रिय भागीदारी एवं दीर्घकालिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार के युवा केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले बनें। इससे राज्य में आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि उक्त सम्मेलन उद्देश्य “निवेश, प्रशिक्षण एवं रूपांतरण” को ध्यान में रखकर राज्य में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना, कौशल प्रशिक्षण प्रणाली को सुदृढ़ करना तथा आर्थिक एवं रोजगार के क्षेत्र में रूपांतरण को गति देना है। उन्होंने आगे कहा कि उद्योग एवं सरकार के समन्वित प्रयासों से ही राज्य के युवाओं को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे भविष्य में रोजगार सृजक के रूप में भी उभरेंगे। राज्य सरकार द्वारा आई.टी आई संस्थानों के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विश्वस्तरीय कौशल संस्थानों के रूप में विकसित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि सम्मेलन में देश के अग्रणी उद्योग समूहों ने सक्रिय भागीदारी की – Schneider Electric, Tata Technologies, Ericsson, Piramal Foundation, Jindal Steel & Power, Apollo Mediskills, NTTF, Bata Group सहित विभिन्न क्षेत्रों के 30 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने भाग लिया। यह भागीदारी आईटी, एयरोस्पेस, Al, Aerospace, खाद्य प्रसंस्करण, रिटेल एवं प्रौद्योगिकी जैसे विविध क्षेत्रों को समाहित करती है।सम्मेलन के दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र Public Private Partnership (PPP) को सुदृढ़ करना तथा प्रमुख सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्रीदृसेतु योजना (PM SETU) एवं मेगास्किल सेंटर (MSC) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उद्योगों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करना रहा। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से इन योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों, संस्थागत व्यवस्था तथा उद्योगों की भूमिका पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर उद्योग प्रतिनिधियों ने बिहार में कौशल विकास को सशक्त बनाने हेतु अपनी रुचि एवं प्रतिबद्धता व्यक्त की तथा राज्य सरकार के साथ मिलकर प्रशिक्षण, रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों को बढ़ाने में सहयोग देने की सहमति व्यक्त की।
परिचर्चाओं के दौरान बदलते औद्योगिक परिदृश्य के अनुरूप कौशल क्षेत्रों की पहचान, प्रधानमंत्री सेतु योजना के अंतर्गत उत्तरदायित्वों का निर्धारण तथा उद्योगों की भागीदारी से विशेष प्रयोजन इकाई (SPV) के गठन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।मुक्त संवाद सत्र में उद्योगों से प्राप्त सुझावों एवं प्रतिक्रियाओं ने नीतिगत निर्णयों को और अधिक सहभागी तथा प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं पारस्परिक संवाद सत्र के साथ हुआ।


